दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में 26 जनवरी के दिन का एक अलग ही महत्व है. इस दिन सभी हिंदुस्तानी देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो जाते हैं. आख़िर साल 1950 में इस दिन हमारा संविधान जो लागू हुआ था. जिसके बाद इस दिन को गणतंत्र दिवस (Republic Day 2022) के रूप में मनाया जाने लगा. ये हर देशवासी के लिए कोई मामूली दिन नहीं है, बल्कि हमारे राष्ट्र के प्रति सम्मान और शौर्य का प्रतीक है. यही वजह है कि भारत में इस दिन होने वाली गणतंत्र दिवस की परेड की पूरी दुनिया क़ायल है.

इस दिन लागू किया गया हमारा संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिख़ित संविधान है. इसमें 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां हैं. हालांकि, भारत में 26 जनवरी की तारीख़ गणतंत्र दिवस की ही वजह से नहीं, बल्कि अतीत की और कई घटनाओं के चलते याद की जाती है. 

हालांकि, भारत में 26 जनवरी की तारीख़ गणतंत्र दिवस की ही वजह से नहीं, बल्कि अतीत की और कई घटनाओं के चलते याद की जाती है. तो चलिए एक-एक करके आपको उन सभी घटनाओं के बारे में बता देते हैं.

26 January History

1. मुग़ल सम्राट बाबर के बेटे हुमायूं की मौत

मुग़ल सम्राट बाबर के बेटे हुमायूं की मौत 26 जनवरी 1556 को हुई थी. उसकी मौत दिल्ली के दीनपनाह क़िले के ‘शेर मंडल’ नामक पुस्तकालय की सीढ़ी से गिरकर हुई थी. उसकी कब्र को दिल्ली में ही दफ़नाया गया था. हुमायूं की मृत्यु के बाद उसी साल उसके बेटे अकबर को मुग़ल साम्राज्य का उत्तराधिकारी बनाया गया था.

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2. ब्रिटिश शासन के अंतर्गत पहली बार मनाया गया स्वराज दिवस

26 जनवरी 1929 को पहली बार लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में गुलाम भारत में पूर्ण स्वराज की प्रतिज्ञा ली गई थी. इस दिन कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने पूर्ण स्वराज का प्रण लेकर ब्रिटिश राज को एक साल के अंदर सत्ता छोड़ने की चेतावनी दी थी. इसके एक साल बाद 26 जनवरी 1930 को भारत में पूर्ण स्वराज दिवस और स्वतंत्रता दिवस 18 सालों तक मनाया जाता रहा. फ़िर देश को आज़ादी मिलने के बाद 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा. (26 January History)

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3. ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ के दौरान जेल से महात्मा गांधी की रिहाई

पूर्ण स्वराज्य प्राप्त करने के लिए कांग्रेस से जुड़े लोगों ने ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ शुरू किया था. साल 1930 में इसका कार्यभार महात्मा गांधी को दे दिया गया. ब्रिटिश काल के दौरान नमक उत्पादन और विक्रय के ऊपर बड़ी मात्रा में टैक्स लगा दिया गया था. भारतवासियों को इस क़ानून से आज़ाद करने के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन की नींव रखी गई थी. आंदोलन के रफ़्तार पकड़ने के बाद 4 मई 1930 को महात्मा गांधी को गिरफ़्तार कर लिया गया था. लेकिन 26 जनवरी 1930 को इस मामले में ब्रिटिश सरकार ने बातचीत के ज़रिये इस चीज़ का हल निकालना सही समझा और महात्मा गांधी को रिहा कर दिया गया.

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4. स्वतंत्र भारत के पहले और अंतिम गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का त्यागपत्र 

26 जनवरी, 1950 में स्वतंत्र भारत के पहले और अंतिम गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया. इसके बाद डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बनाए गए. (26 January History)

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5. अशोक स्तंभ को मिला ‘राष्ट्रीय प्रतीक’

उत्तर प्रदेश के सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के सिंहों को 26 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में मान्यता मिली थी. हमारे राष्ट्रीय झंडे के बीच जो अशोक चक्र विद्यमान है, उसे अशोक स्तंभ से ही लिया गया है.

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6. मोर को घोषित किया गया राष्ट्रीय पक्षी

मोर के अद्भुत सौंदर्य के चलते 26 जनवरी, 1963 को इसे राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया था. 

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7. दिल्ली के इंडिया गेट पर राष्ट्रीय स्मारक ‘अमर जवान ज्योति’ को स्थापित किया गया

अमर जवान ज्योति का निर्माण 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में जान गंवाने वाले भारतीय सैनिकों के लिए एक स्मारक के रूप में किया गया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 26 जनवरी, 1972 को इसका उद्घाटन किया था. तब से लेकर अब तक ये लौ निरंतर जल रही है. (26 January History)

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26 जनवरी की ख़ासियतों की तो लाइन लगी पड़ी है.