History of Chutney: भारतीय व्यंजनों में एक ख़ास चीज़ जो अमूमन हर घर में खाई जाती है, वो है चटनी. जी हां, इसका चटपटा ज़ायका न सिर्फ़ भारतीय थाली की रौनक बढ़ा देता है, बल्कि काफ़ी देर तक जुंबा पर भी ठहर जाता है. अलग-अलग व्यंजनों के साथ अलग-अलग तरह की चटनी, जैसे मूंग की दाल के पकौड़ों के संग पुदीने की चटनी, समोसों के संग टमाटर और धनिए की चटनी. चटनी की ख़ासियत ये है कि इसे आप जैसे चाहें वैसा बना सकते हैं, खट्टा, मीठा, तीखा या फिर खट्टा-मीठा. वहीं, आपको उत्तर से लेकर दक्षिण भारतीय घरों में और भी कई तरह की चटनी देखने को मिल जाएंगी. 


वैसे क्या आपको पता है चटनी कैसे आपकी थाली का हिस्सा बनी? अगर नहीं, तो इस लेख को अंत तक ज़रूर पढ़ें. यहां हम आपको चटनी के इतिहास (Chutney Ka Itihas) से जुड़ी बातें बता रहे हैं.    

आइये, अब विस्तार से जानते हैं भारतीय चटनी का इतिहास (Chutney Ka Itihas) 

बंगाली खाने का अहम हिस्सा 

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Chutney Ka Itihas: चटनी के बारे में बात करते हुए बंगाल का ज़िक्र न आए, ऐसा हो नहीं सकता. अगर आप कभी किसी बंगाली परिवार के घर जाएं, तो परोसे गए खाने में चटनी ज़रूर दिख जाएगी. वहीं, घर का खाना हो या फिर शादी का खाना, आपको खजूर और टमाटर की चटनी दोनों जगह नज़र आ जाएगी. इसके अलावा, शादी के खाने में कासुंदी (सरसों की बनी चटनी) नाम की चटनी भी परोसी जाती है, जिसे फ़िश या वेज़ कटलेट के साथ दिया जाता है. अब आप समझ गए होंगे कि चटनी कोई आम डिश नहीं बल्कि काफ़ी महत्वपूर्ण व्यंजन है.  

जुड़ा है एक लोकप्रिय क़िस्सा  

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Chutney Ka Itihas: ऐसा माना जाता है कि चटनी शब्द की उत्पत्ति संस्कृति के शब्द ‘चाटनी’ से हुई है, जिसका मतबल होता है चाटना. वहीं, इसके इतिहास से एक लोकप्रिय क़िस्सा भी जुड़ा है. एक 17वीं शताब्दी की कहानी ये है कि एक बार मुग़ल बादशाह शाहजहां बीमार पड़ गए थे. उपचार के रूप में उन्हें हकीम ने स्वाद से भरपूर मसालेदार चीज़ खाने की सलाह दी, जो आसानी से पच सके. 

हकीम के कहने पर पुदीना, धनिया, जीरा, अलसी, लहसुन व सोंठ जैसी कच्ची चीज़ों को मिलाकर व पीसकर चटनी बनाई गई. हकीन ने ये भी कहा कि इसे कम मात्रा में भी खाया जाए. इसकी लोकप्रिय कहानी में चाट का भी ज़िक्र मिलता है, लेकिन ये नहीं कहा जा सकता है कि चाट पहले आई कि चटनी.  

भोजन का सबसे पुराना रूप  

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History of Chutney in Hindi: इतिहासकार और फ़ूड क्रिटिक पुष्पेश पंत का कहना है कि कई चीज़ों को पीसकर बनाया गया एक मोटा पेस्ट चटनी का सबसे सामान्य और सरल रूप है. वहीं, वो आगे कहते हैं कि, “ऐसा हो सकता कि चटनी होमो सेपियन्स द्वारा बनाए गए खाने का सबसे पुराना रूप हो. वहीं, ये होमो सेपियन्स द्वारा बनाई जाने वाली अन्य चीज़ों से पुरानी हो सकती है और इसका आविष्कार हमारे पुर्वजो द्वारा दुर्घटनावश ही हुआ हो.”   

‘चटनी’ शब्द के दायरे का विस्तार  

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इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अंग्रेज़ों ने ‘चटनी’ शब्द के दायरे को बढ़ाने का काम किया है. Hobson-Jobson (Glossary of Colloquial Anglo-Indian Words) नाम की डिक्शनरी में चटनी को बताया गया है कि, “ ये एक प्रकार का तीखा गाढ़ा पेस्ट (Relish) है, जो कई मसालों और फलों से बना होता है. इसका उपयोग भारत में किया जाता है और विशेष रूप से मुसलमानों द्वारा किया जाता है, जिसके गुण अब इंग्लैंड में प्रसिद्ध हैं.” वहीं, जब ये भारत की सीमा लांघ अन्य जगहों पर पहुंची, तो इसके अलग-अलग रूप सामने आने लगे.   

औपनिवेशिक काल के दौरान विकसित हुईं कई चटनी  

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Chutney Ka Itihas: खाद्य इतिहासकार और सलाहकार पृथा सेन का कहना है कि बाटा और अंबोली जैसी पारंपरिक चटनी कई उद्देश्यों की पूर्ति करती थीं, जैसे पाचन में सहायता, शरीर को ठंडा करने के लिए और भोजन के उन हिस्सों का उपयोग करने के लिए जो बर्बाद हो जाते थे. हालांकि, सेन का तर्क है कि कई बंगाली चटनी चाहे वह टमाटर की चटनी हो या कच्चे पपीते से बनी, इनके विकसित होने की सबसे अधिक संभावना औपनिवेशिक काल के दौरान हो सकती है. 


इस दौरान मीठी और खट्टी चटनी समाज के संपन्न वर्गों में लोकप्रिय हो गई थी, जो टमाटर जैसी विदेशी नई सामग्री के दीवाने थे. सेन कहती हैं, व्यक्ति जितना अमीर होता था, चटनी में उतनी ही सामग्रियां डला करती थी, चाहे वो सूखे मेवे हों या अन्य सामग्री. इन चटनी का उपयोग भोजन के अंत में और मिठाई खाने से पहले किया जाता था.    

भारत के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार की चटनियां आज बनाई जाती हैं, जिन्हें आप नीचे दी गई तस्वीर के ज़रिये देख सकते हैं. 

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उम्मीद करते हैं कि चटनी का चटपटा इतिहास आपको अच्छा लगा होगा. इस विषय पर अगर आप कुछ कहना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स की मदद ले सकते हैं.