First Selfie In India: जब से मोबाइल कैमरा आया है, तब से सेल्फ़ी का चलन बहुत बढ़ गया है. फ़्रंट कैमरा आने के बाद तो लोगों ने एकदम चरस ही बो दी है. हर जगह आपको सेल्फ़ी लेते लोग मिल जाएंगे. कुछ तो इस चक्कर में अपनी जान से भी हाथ धो बैठते हैं.

सेल्फ़ी की ये बढ़ती लोकप्रियता ही थी कि ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी ने इस शब्द को ही साल 2013 में वर्ड ऑफ़ द ईयर घोषित कर दिया था.

लेकिन अगर आपको लगता है कि सेल्फ़ी मॉडर्न दुनिया की देन है, तो फिर थोड़ा ठहर जाइए. क्योंकि, इसका चलन तो मोबाइल के आने से पहले ही शुरू हो गया था. जी हां, भारत में भी बहुत पहले से लोग सेल्फ़ी लेते आ रहे हैं.

मगर क्या आप बता सकते हैं कि पहली बार सेल्फ़ी किसने और कब ली थी?

भारत की पहली सेल्फ़ी (First Selfie In India)

भारत में पहली सेल्फ़ी 19वीं शताब्दी में त्रिपुरा के महाराजा बीर चंद्र माणिक्य (Maharaja Bir Chandra Manikya) और उनकी रानी खुमान चानू मनमोहिनी देवी (Maharani Khuman Chanu Manmohini Devi) ने खींची थी. इस कपल को आर्ट और फ़ोटोग्राफ़ी का बहुत शौक़ था. यहां तक कि महाराजा बीर चंद्र माणिक्य ही दूसरे शाही व्यक्ति थे, जिन्होंने कैमरा रखा था. पहले व्यक्ति इंदौर के राजा दीन दयाल थे.

सेल्फ़ी डिवाइस का इस्तेमाल

महाराजा ने साल 1880 के आसपास भारत की पहली सेल्फ़ी खींची थी. तस्वीर में महाराजा बीर चंद्र ने अपनी पत्नी को बाहों में पकड़ा हुआ है. रानी ने भी अपना हाथ महाराज के गले में डाल रखा है.

मगर इस दौरान ध्यान देने वाली एक चीज़ और है. महराजा का लेफ़्ट हैंड. गौर से देखेंगे तो मालूम पड़ेगा कि महाराजा ने हाथ में एक डिवाइस पकड़ी हुई है.

डिवाइस न केवल एक लीवर जैसा दिखता है, बल्कि वैसा ही काम भी करता है. इसमें एक लंबा तार कैमरे से जुड़ा होता है. लीवर को खींचते ही तस्वीर खिंच जाती है. तो इस तरह महाराजा बीर चंद्र और उनकी रानी मनमोहिनी देवी ने भारत की पहली सेल्फ़ी ली थी. (First Selfie In India)

फ़ोटो डेवलेप करने का स्टूडियो भी खोला

उस वक़्त न तो कैमरा आसानी से मिलता था और न ही तस्वीर डेवलेप हो सकती थी. ऐसे में महाराजा ने अगरतला में अपना ही एक डार्करूम खोला, जहां वो फ़ोटोज़ डेवलेप करते थे. इतना ही नहीं, उन्होंने एक कैमरा क्लब भी खोला था, जहां फ़ोटोज़ की प्रदर्शनी लगती थी.

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