How Feroze Gandhi Got Gandhi Surname: गांधी परिवार के सरनेम को लेकर देश में हमेशा चर्चा होती रहती है. लोग सवाल करते हैं कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी तो जवाहर लाल नेहरू की फ़ैमिली से हैं तो उनके नाम के आगे गांधी क्यों और फ़िरोज़ गांधी तो पारसी थी, फिर वो गांधी सरनेम कैसे इस्तेमाल करने लगे?

चलिए आज आपको इसी सवाल का जवाब देते हैं कि कैसे फ़िरोज़ गांधी ने गांधी सरनेम अपनाया और कैसे ये नेहरू फ़ैमिली के नाम के आगे जुड़ गया.

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इंदिरा गांधी के वक़्त से शुरू हुआ सरनेम

प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की बेटी इंदिरा ने फ़िरोज़ गांधी से शादी की और उसके बाद उन्होंने फ़िरोज का सरनेम गांधी अपना लिया. मगर बहुत से लोग सवाल उठाते हैं कि फ़िरोज़ तो पारसी थी और फिर वो गांधी कैसे हो गए. इस सवाल का जवाब हमें फ़िरोज़ गांधी के अतीत में मिलता है.

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दरअसल, फ़िरोज़ का जन्म मुंबई में 12 सिंतबर 1912 में पारसी परिवार में हुआ. उनके पिता का नाम ‘जहांगीर फ़रदून घांडी’ था. ये लोग मुंबई के खेतवाड़ी में नौरोजी नाटकवाला भवन में रहते थे. हालांकि, फ़िरोज़ गांधी की परवरिश इलाहाबाद में हुई. पहले फ़िरोज़ गांधी का नाम फ़िरोज़ जहांगीर घांडी (Feroze Jehangir Ghandy) था.

How Feroze Gandhi Got Gandhi Surname

फ़िरोज के आधिकारिक जीवनी Feroze the Forgotten Gandhi लिखने वाले बर्टिल फाक कहते हैं कि फ़िरोज़ आज़ादी के आंदोलन में उतर गए थे. वो महात्मा गांधी से प्रभावित थे. ऐसे में उन्होंने अपना सरनेम घांडी से बदलकर गांधी कर लिया. कई रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि उनका घांडी सरनेम गांधी से मिलता जुलता था, जिससे कई लोग उन्हें गांधी ही कहते थे. साथ ही कई बार अख़बारों में भी उनका नाम गांधी ही लिखा जाने लगा और वो गांधी से ही फ़ेमस होने लगे और उन्होंने हमेशा के लिए अपना सरनेम गांधी ही रख लिया. इसके बाद से इंदिरा गांधी के नाम में भी गांधी जुड़ गया.

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हालांकि, इंदिरा गांधी की बुआ कृष्णा हठीसिंग ने अपनी किताब ‘इंदू से प्रधानमंत्री’ में कहा है कि फ़िरोज का कुलनाम गांधी ही था, इसे अपभ्रंश के तौर पर घांडी भी कहा जाता था. वो लिखती हैं, गांधी कुलनाम या उपनाम है. इसका संबंध भी अन्य भारतीय उपनामों की तरह परिवार के पेशे या व्यवसाय से है. जो लोग मोदी, पंसारी या गंधी का काम करते थे, वो गांधी कहलाते थे.

ऐसे में फ़िरोज़ घांडी का नाम फ़िरोज़ गांधी हो गया और इंदिरा नेहरू ने शादी के बाद गांधी सरनेम अपना लिया. उसके बाद से उनके बच्चे और बच्चों के बच्चे भी गांधी ही सरनेम इस्तेमाल कर रहे हैं.

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