Journey of Rahul Bajaj : 'बजाज चेतक' सिर्फ़ एक स्कूटर नहीं था बल्कि वो कई भारतीयों की सुनहरी यादों का हिस्सा बन चुका है. वहीं, इस याद को देने का श्रेय जाता है राहुल बजाज को. भारत का वो बिज़नेसमैन जिसने आम इंसान को स्कूटर की सैर कराई. हालांकि, वर्तमान में राहुल बजाज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भारत के लिए उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा. आइये, इस लेख में जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण व दिलचस्प बातें. 

आइये, अब विस्तार से जानते हैं राहुल बजाज के बारे में. 

शुरुआती जीवन  

Rahul Bajaj
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राहुल बजाज का जन्म (Journey of Rahul Bajaj) 30 जून 1938 को कलकत्ता शहर में हुआ था. उनके पिता का नाम था कमलनयन बजाज और माता का नाम था सावित्री बजाज. उनके दादा जमनलाल एक स्वतंत्रता सेनानी थे और महात्मा गांधी के बड़े क़रीबी बताए जाते थे. उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई मुंबई के Cathedral and John Connon School से पूरी की थी. इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई St. Stephen's College (दिल्ली) और Government Law College (मुंबई) से पूरी की थी. इसके बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए यूएस के हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल चले गए थे.

1965 में किया था बजाज ग्रुप को ज्वाइन

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 राहुल बजाज (Journey of Rahul Bajaj) ने अपने दादा जमनलाल बजाज द्वारा स्थापित ‘बजाज ग्रुप’ को 1965 में ज्वाइन किया था. वहीं, 1968 में वो कंपनी के सीईओ बनें. वहीं, वो ‘Industry Body Confederation of Indian Industry’ के दो बार (1979-80 & 1999-2000) चेयरमैन भी रह चुके हैं. बजाज कंपनी के चेयरमैन पद पर वो क़रीब 40 वर्षों तक रहे. 

किया बिज़नेस का विस्तार 

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राहुल बजाज के अंतर्गत कंपनी ने कम समय में काफ़ी विस्तार किया. स्कूटर के साथ-साथ इलेक्ट्रिकल अप्लायंसेज व सिमेंट बिज़नेस को भी शामिल किया. राहुल बजाज मार्केटिंग, एकाउंट्स, पर्चेस एंड ऑडिट को बारीकी से देखते थे. इसके अलावा, वो बिज़नेस रणनीति भी तैयार करते थे. इनके नेतृत्व में ही कंपनी ने 7.2 करोड़ से 12 हज़ार करोड़ के टर्नओवर का सफ़र पूरा किया था.  2008 में राहुल बजाज ने कंपनी को तीन हिस्सों में बांट दिया एक बजाज ऑटो, बजाज फ़ीनसर्व और होल्डिंग कंपनी.

‘बजाज चेतक’ के ज़रिए बदली कंपनी की किस्मत 

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Journey of Rahul Bajaj : अपने पिता कमलनयन बजाज के निधन के बाद 1972 में बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर का ज़िमा संभाला. उनके नेतृत्व में कंपनी ने और मजबूत पकड़ी. बजाज चेतक और बजाज सुपर इन्हीं की देन थी. इनका स्कूटर का रंग भारतीयों पर ऐसा छाया कि ये बहुत जल्द आम इंसान के घर का हिस्सा हो गया था. उन्होंने बजाज स्कूटर के विज्ञापन में 'बुलंद भारत की बुलंद तस्‍वीर' जैसे शब्दों से भारतीय के इमोशन को स्कूटर से जोड़ा.  

नुकसान का दौर  

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कहते हैं कि 2000s के दौरान बजाज ग्रुप (Journey of Rahul Bajaj) थोड़ी मंदी के दौर से भी गुज़रा, जब यामाहा, सुज़ुकी व होंडा जैसी बाहरी कंपनियों ने अपने दो-पहिया वाहन भारत में लॉन्च किये. हालांकि, जल्द ही बजाज पल्सर को लॉन्च कर कंपनी ने मंदी की भरपाई की. आज भी बजाज पल्सर एक लोकप्रिय ब्रांड बना हुआ है.   

निडर और बेबाक 

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राहुल बजाज (Journey of Rahul Bajaj) अपनी निडरता और बेबाकी के लिए भी जाने जाते थे. उनके दोस्त भी उन्हें निडर कहा करते थे. वो अपनी बात किसी के भी सामने बड़ी स्पष्टता के साथ रखते थे. बड़े नेताओं के बीच भी वो अपनी बेबाकी व निडरता पर कायम रहते थे. कहते हैं कि जब Piaggio नाम की इटालियन टू व्हीलर मैन्युफैक्चरर ने बजाज का लाइसेंस रीन्यू नहीं किया था, तो बजाज भारत में ही अपने स्कूटर (चेतक और सुपर) का निर्माण करने लगे थे.   

मिले कई अवार्ड  

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अपने जीवन (Journey of Rahul Bajaj) में उन्हें कई अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है. उन्हें 2001 में पद्म भूषण (Third Highest Civilian Award) से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा, वो 1986 में इंडियन एयरलाइन के चेयरमैन भी रह चुके हैं. वहीं, 2006 से लेकर 2010 तक वो राज्य सभा से सदस्य भी रह चुके हैं. साथ ही उन्हें 2017 में CII President’s Award ( Lifetime Achievement) भी मिला था.