रानी दुर्गावती (Rani Durgavati) भारत की एक ऐसी वीरांगना थीं जिनके युद्ध कौशल के सामने बड़े से बड़े मुग़ल सम्राट भी टिक नहीं पाये. अकबर समेत कई मुग़ल शासकों ने रानी दुर्गावती के राज्य पर आक्रमण किया, लेकिन रानी दुर्गावती ने अपने राज्य की रक्षा के लिए मुग़लों से अंतिम सांस तक युद्ध किया. रानी दुर्गावती हर उस शख़्स को करारा जवाब दिया जिसने भी उनके राज्य की ओर आंख उठाकर देखी.

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रानी दुर्गावती, Rani Durgavati
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कौन थीं रानी दुर्गावती? 

रानी दुर्गावती 1550 से 1564 तक 'गोंडवाना' की रानी थीं. उनका जन्म 5 अक्टूबर 1524 को 'महोबा के क़िले' में हुआ था. दुर्गावती के पिता का नाम पृथ्वी सिंह चंदेल था, जो गढ़मंडला राज्य के राजा थे. दुर्गावती राजा पृथ्वी सिंह चंदेल की इकलौती संतान थीं. नाम के अनुरूप ही तेज़, साहस, शौर्य और सुन्दरता के कारण दुर्गावती की प्रसिद्धि देशभर में फैल गयी. दुर्गावती को बचपन से ही तीर व बंदूक चलाने का शौक था. युवा अवस्था में आने तक वो कुशल योद्धा बन गयी थीं.

 Rani Durgavati Childhood
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रानी दुर्गावती का विवाह गोंडवाना साम्राज्य के राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह मडावी से हुआ था, लेकिन विवाह के 4 वर्ष बाद ही पति की असमय मृत्यु के बाद दुर्गावती ने अपने पुत्र वीरनारायण को सिंहासन पर बैठाकर उसके संरक्षक के रूप में स्वयं शासन करना प्रारंभ किया. इस दौरान उन्होंने अनेक मठ, कुएं, बावड़ी तथा धर्मशालाएं बनवाईं और उनके शासन में राज्य की काफ़ी उन्नति हुई.

रानी दुर्गावती, Rani Durgavati
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अकबर के सेनापति को को चटाई धूल

रानी दुर्गावती, मुगल सम्राट अकबर के सेनापति आसिफ़ ख़ान को शिकस्त देने के लिये भी जानी जाती हैं. सन 1563 में अकबर की सेना रानी दुर्गावती के राज्य 'गोंडवाना' पर कब्ज़े के मकसद से निकली थी, लेकिन दुर्गावती के हौसलों के आगे ये संभव न हो पाया. गोंडवाना पर हमला करने से पहले ही रानी दुर्गावती अकबर के सेनापति आसफ़ ख़ान से भिड़ गयीं. इस दौरान रण के मैदान में दुर्गावती के शौर्य कौशल को देख आसिफ़ ख़ान विस्मित हो उठा था और वहां से भाग निकला.

इस दौरान आसफ़ ख़ान ने कहा था 'कोई नारी भी इतनी शूरवीर हो सकती है, मैने तो सोचा तक नही था'.

Rani Durgavati Warrior
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दुर्गावती ने अकबर की 10,000 सैनिकों की सेना को हराया  

इस हार से मुग़ल सम्राट अकबर का सेनापति आसिफ़ ख़ान बौखला गया. इस बार वो मुग़ल सम्राट अकबर की सल्तनत के अधीन आने वाले मालवा के शासक बाज बहादुर के साथ मिलकर 10 हज़ार घुड़सवार, सशस्त्र सेना और तोपखाने के साथ रानी दुर्गावती के 'गोंडवाना' राज्य पर हमला कर दिया, लेकिन रानी दुर्गावती के युद्ध कौशल के आगे ये दोनों शूरवीर टिक नहीं पाये और खाली हाथ वापस लौट गये.

Rani Durgavati Warrior
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अकबर का आदेश मानने से किया इंकार

रानी दुर्गावती के हाथों अपनी सेना की 2 हार के बाद मुगल बादशाह अकबर बौखला गया. इसके बाद अकबर ने रानी के प्रिय सफ़ेद हाथी (सरमन) और उनके विश्वस्त वजीर आधार सिंह को भेंट के रूप में अपने पास भेजने का आदेश दिया, लेकिन रानी दुर्गावती ने अकबर की ये मांग ठुकरा दी. इस बात से अकबर आग बबूला हो उठा. इसके बाद उसने अपनी पूरी ताक़त के साथ तीसरी बार फिर से सेनापति आसिफ़ ख़ान के नेतृत्व में 23 जून, 1564 को 'गोंडवाना' पर आक्रमण कर दिया.

Rani Durgavati And Akbar
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रानी दुर्गावती के हाथों अपनी सेना की 2 हार के बाद मुगल बादशाह अकबर बौखला गया. इसके बाद अकबर ने रानी के प्रिय सफ़ेद हाथी (सरमन) और उनके विश्वस्त वजीर आधार सिंह को भेंट के रूप में अपने पास भेजने का आदेश दिया, लेकिन रानी दुर्गावती ने अकबर की ये मांग ठुकरा दी. इस बात से अकबर आग बबूला हो उठा. इसके बाद उसने अपनी पूरी ताक़त के साथ तीसरी बार फिर से सेनापति आसिफ़ ख़ान के नेतृत्व में 23 जून, 1564 को 'गोंडवाना' पर आक्रमण कर दिया. 

Rani Durgavati Warrior
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आसिफ़ ख़ान इससे पहले भी रानी दुर्गावती 2 बार हार चुका था, लेकिन इस बार वो अपनी दुगुनी सैन्य ताक़त के साथ गया था. इस दौरान रानी दुर्गावती के पास बेहद कम सैनिक थे. बावजूद इसके उन्होंने आसिफ़ ख़ान को कड़ी टक्कर देना का फैसला किया. इस बीच उन्होंने अपने 2000 सैनिकों के साथ मुगल सेना पर धावा बोल दिया. मध्यप्रदेश के जबलपुर के पास नरई नाले के पास हुए इस युद्ध में रानी दुर्गावती की सेना ने अकबर की सेना के 3000 हज़ार सैनिकों को मार गिराया, लेकिन तब तक रानी की सेना भी आधी से भी कम हो गई थीं.  

Rani Durgavati Warrior
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अगले दिन 24 जून, 1564 को मुगल सेना ने गोंडवाना पर फिर से फिर हमला कर दिया. इस दौरान मुग़ल सेना ने रानी के सभी सैनिकों को मार गिराया. ऐसे में घायल रानी दुर्गावती अकेले पड़ गईं. इस बीच बुरी तरह से घायल होने पर रानी ने अंत समय निकट देख अपनी कटार स्वयं ही अपने सीने में भोंक कर आत्म बलिदान दे दिया था. इस दौरन वो केवल 39 साल की थीं.

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