साल 2010 में अरशद वारसी, नसीरुद्दीन शाह और विद्या बालन की एक फ़िल्म ‘इश्किया’ रिलीज़ हुई थी. इस मूवी का एक गाना बहुत फ़ेमस हुआ था. ‘इब्न बतूता, बगल में जूता, पहने तो करता है चुर्र…’
लेकिन उससे पहले आप ये गाना एक बार सुन लीजिये:
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इब्न बतूता को जानना है, तो इतिहास में जाना होगा

दरअसल, उस वक़्त लोग बाहर घूमने के नाम पर केवल धार्मिक यात्राएं ही करते थे. मगर इब्न-ए-बतूता वास्तव में दुनिया घूमने और समझने निकला था. वो भी महज़ 21 साल की उम्र में. हालांकि, वो एक इस्लामिक स्कॉलर था. घूमने भी वो हज यात्रियों के साथ ही गया था. मगर लौटा नहीं. उसने तय किया कि वो बाकी की दुनिया भी देखेगा.
30 साल तक करता रहा ट्रैवल

इब्न बतूता ने अफ्रीका, एशिया और दक्षिणपूर्वी यूरोप के अधिकतर हिस्सों में यात्रा की थी. अपनी यात्रा में वो उत्तरी अफ्रीका, मिस्र, अरब, फ़ारस, अफ़गानिस्तान तक गए. यहां तक वो हिमालाय को पार कर भारत, चीन, दक्षिण-पूर्व एशिया, मालदीव तक घूमे.
1332 की आख़िर में वो भारत पहुंचा. उस वक़्त मुहम्मद बिन तुगलक का शासन था, जिन्होंने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया. इब्न बतूता कुछ वक़्त तक सुल्तान के दरबार में भी रहा. उसने 30 वर्षों में लगभग 1,20,000 किलोमीटर की दूरी तय की.

उसकी इस यात्रा का का सारा लेखा-जोखा ‘रिहला’ में पढ़ा जा सकता है. जिसका मतलब होता है सफ़रनामा. इसमें आपको उन सभी जगहों के लोगों की ज़िंदगी, खान-पान से लेकर रहन-सहन तक पढ़ने को मिलेगा. साथ ही, इस किताब में ये भी ज़िक्र है कि इब्न बतूता ने अपनी यात्राओं के दौरान क़रीब 10 बार शादी की. अफ़्रीका, यूरोप और एशिया में उनके बच्चे भी हुए.