Alita नाम का ये प्यारा सा डॉगी जब कुछ ही महीने का था, उस वक़्त एक ट्रेन हादसे में वो अपना एक पैर गंवा बैठा था. इसके बाद नोएडा का एक एनजीओ इस डॉगी की मदद के लिए आगे आया. इस एनजीओ के लोगों ने Alita के पैर को ठीक कराने की काफ़ी कोशिशें कीं, लेकिन वो इसमें कामयाब नहीं हो सके.

हालांकि, एनजीओ इस बात से दुखी था कि Alita अब शायद ही कभी अपने पैरों पर चल पायेगी, लेकिन नोएडा की 5 स्कूली छात्राऐं इस डॉगी के लिए फ़रिश्ता बनकर आई हैं. पिछले 10 महीनों से एक पैर के बिना Alita को अपना जीवन कुछ अधूरा सा लग रहा था, लेकिन इन छात्राओं ने इस डॉगी को फिर से चल-फिरने के क़ाबिल बना दिया है.

दरअसल, नोएडा के 'शिव नाडर स्कूल' की 10वीं कक्षा की 5 छात्राओं ने अपने स्कूल के एक प्रोजेक्ट 'कैपस्टोन' के तहत Alita के लिए 3D प्रिंट वाले कृत्रिम पैर डिज़ाइन किए हैं.

News18 से बातचीत में इन 5 लड़कियों में से एक आरूषि शाह ने बताया कि पहले हम ह्यूमन प्रोस्थेटिक्स पर रिसर्च कर रहे थे, लेकिन हमने महसूस किया कि मनुष्यों के पास पहले से ही बहुत सारे विकल्प हैं और वो अपना उपचार ख़ुद कर सकते हैं. फिर हमारी टीम ने घायल कुत्तों को देखने का फ़ैसला किया. इसके बाद हमने एनिमल्स प्रोस्थेटिक्स पर काम करना शुरू किया.

इस दौरान आरुषि शाह और उनकी साथियों उत्पल चौहान, नव्या अग्रवाल, स्प्रीहा सिंह और श्रेया मित्तल की इस टीम ने कटे पैर वाले कई कुत्तों पर अध्ययन किया साथ ही कई मॉडल भी तैयार किये. आख़िरकार उन्होंने Alita के लिए '3D प्रिंट प्रोस्थेटिक्स लेग' का मॉडल तैयार किया.

नोएडा के 'शिव नाडर स्कूल' की इन छात्राओं को '3D प्रिंट एनिमल्स प्रोस्थेटिक्स' बनाने में 6 महीने का वक़्त लग गया. इस दौरान छात्राओं ने हर कुत्ते के लिए अलग-अलग '3D प्रिंट प्रोस्थेटिक्स लेग' बनाये.

इन छात्राओं की इस कोशिश के चलते अब न सिर्फ़ Alita, बल्कि उसके जैसे कई अन्य कुत्ते भी फिर से चल फिर पा रहे हैं.

भारत में तकरीबन 30 मिलियन से अधिक आवारा कुत्ते हैं, जिन्हें खाने पीने से लेकर मेडिकल सुविधाएं मिल नहीं पाती हैं. भूख-प्यास के चलते लोगों के घरों में घुस पड़ते हैं, जिसके चलते कई लोग तो इन कुत्तों को मार-मारकर घायल तक कर देते हैं. ऐसे में घायल कुत्तों को हमारे देश में किसी भी तरह की मेडिकल सुविधा नहीं मिल पाती है.