इंसान जब पैदा होता है तो कुछ रिश्ते उसे जन्म के साथ ही मिल जाते हैं. ये रिश्ते उसे चुनने नहीं पड़ते, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जिन्हें हम ख़ुद चुनते हैं. ऐसा ही एक रिश्ता है दोस्ती.  

दोस्ती की मिसालें तो अपने ख़ूब सुनी होंगी, लेकिन कुछ मिसालें दोस्ती को हमेशा के लिए अमर कर जाती हैं. दोस्ती की ऐसी ही एक मिसाल इन दिनों भारतीय सेना में भी देखने को मिल रही है.  

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आज हम आपको जो कहानी बताने जा रहे हैं, वो तीन दोस्तों की है. ऐसे दोस्त जिनके अंदर बचपन से ही देशसेवा का जुनून था. ये 3 जिगरी दोस्त हैं चिन्मय, आकाश और अनुपम, जो बचपन से साथ पढ़े और अब एक साथ ही भारतीय सेना में अफ़सर भी बन गए हैं. 

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उत्तराखंड के रहने वाले चिन्मय शर्मा, आकाश सजवाण और अनुपम नयाल 6वीं कक्षा से ही दोस्त हैं. इन तीनों ने स्कूली पढ़ाई के दौरान ही ठान लिया कि वो भारतीय सेना में अफ़सर बनेंगे, ऐसा ही हुआ भी. 13 जून को ये तीनों दोस्त भारतीय सेना में अफ़सर बन गए. 

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चिन्मय शर्मा रुद्रप्रयाग के मयकोटी गांव के रहने वाले हैं, आकाश सजवाण गुप्तकाशी के रहने वाले हैं जबकि अनुपम नयाल हल्द्वानी के रहने वाले हैं. चिन्मय के पिता मनोज शर्मा और मां वीना शर्मा दोनों ही सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं. आकाश सजवाण के पिता आनंद सिंह सजवाण का अपना व्यवसाय है और मां मीना सजवाण शिक्षिका हैं. वहीं अनुपम के पिता आनंद सिंह ब्लॉक अफ़सर हैं, जबकि मां जानकी नयाल गृहणी हैं. 

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आज से क़रीब 11 साल पहले इन तीनों की मुलाक़ात नैनीताल के 'घोड़ाखाल सैनिक स्कूल' में हुई थी. इस दौरान इन तीनों ने 6वीं कक्षा में एक साथ एडमीशन लिया था. चिन्मय और आकाश के बीच शुरू से गहरी दोस्ती थी, बाद में क्लास में इनकी दोस्ती अनुपम से भी हो गई. पढ़ाई के दौरान ये तीनों सेना में अफ़सर बनने का सपना देखा करते थे. इसे संयोग ही कहेंगे कि इन तीनों ने पहली बार में ही एनडीए की परीक्षा पास कर ली. इसके बाद ये देहरादून स्थित 'इंडियन मिलेट्री एकेडमी' में साथ ट्रेनिंग करने लगे.  

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13 जून को देहरादून स्थित 'इंडियन मिलेट्री एकेडमी' में अंतिम पग पार करते ही ये तीनों भारतीय सेना का अभिन्न अंग बन गए. आईएमए से विदाई के वक्त तीनों दोस्तों को बिछुड़ने का ग़म तो था, लेकिन उससे कहीं मज़बूत था देश सेवा का जज़्बा जो इन तीनों की आंखों में साफ़ दिख रहा था.