आज बात होगी भोपाल स्थित 300 साल पुराने 'कदीमी रॉयल हमाम' की. हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्हें नवाबों के इस रॉयल हमाम के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

तालों की नगरी में मौजूद नवाबों का ये हमाम, एशिया का सबसे पुराना हमाम माना जाता है और आज भी शाही परिवार के लोग यहां आकर स्नान का आनंद उठाते हैं. इस हमाम की सबसे अच्छी और बड़ी ख़ासियत है, इसमें इस्तेमाल किया जाने वाला गर्म पानी, जिसके लिये ख़ास तकनीक का उपयोग किया जाता है. कहते हैं कि हमाम की ज़मीन पर तांबे की चादर बिछी हुई है और इसी चादर से जुड़ी हुई एक सुरंग है, जिसमें आग जलाने से हमाम का पानी गर्म हो जाता है.

वैसे हमाम का असल मतलब होता है 'गर्मजोशी' और अकसर लोग अपनी शारीरिक थकान मिटाने के लिये यहां स्नान करने जाते हैं, क्योंकि हमाम में आने वाले लोगों को गर्म पानी, स्टीम बाथ, उपटन और मिट्टी से मसाज भी दी जाती है. हांलाकि, अगर आप यहां स्नान करने का प्लान बना रहे हैं, तो ध्यान रहे कि ये सिर्फ़ दीपावली से लेकर होली तक ही खुलता है. इसके अलावा महिलाओं के लिये स्नान का समय सुबह है, तो वहीं पुरुषों के लिये ये शाम को खोला जाता है.

क्या है इसका इतिहास?

'कदीमी रॉयल हमाम' का निर्माण आज से लगभग 300 वर्ष पहले 1718 में हुआ था. इसके बाद इसे नवाबों और और शाही मेहमानों की सेवा के लिये, नवाबों के ख़ास और विश्वसनीय हज्जाम हम्मू खलीदा को सौंप दिया गया.

दुनिया के बाकि हमामों की तरह इसे भी मस्ज़िद के करीब बनाया गया, ताकि नमाज़ पढ़ने जा रहे लोग इसके पानी से ख़ुद को स्वच्छ कर सकें. हमाम के संचालक मुहम्मद जीमल का कहना है कि मसाज के लिये इस्तेमाल की जाने वाली मिट्टी ख़ास तौर पर अजमेर से मंगाई जाती है. इसके साथ ही विशेष जड़ी-बूटी से बने तेल की मालिश देकर स्नान कराया जाता है. यही नहीं, स्नान से न सिर्फ़ लोगों की रंगत बदलती है, बल्कि उनका रक्त संचार भी ठीक रहता है.

नवाबों के शहर भोपाल में नवाबों जैसा फ़ील करने के लिए 'कदीमी रॉयल हमाम' का रुख़ ज़रूर करें.