ठण्ड लगे तो चाय, नींद आये तो चाय, बेचैनी हो तो चाय, हम हिन्दुस्तानियों का चाय से बेहद गहरा नाता है.

'किसी प्यासे की प्यास बुझाने से पुण्य मिलता है' ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी. जयपुर के 94 साल के एक चायवाले की कहानी भी इस कहावत से कुछ मिलती जुलती ही है.

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जयपुर गए और 'गुलाब जी चाय वाले' की चाय नहीं पी, तो आपकी ट्रिप अधूरी है. 94 साल के गुलाब जी की दुकान सन 1947 से शहर के एमआई रोड पर स्थित है. ये एक ऐसी दुकान है जिस पर हमेशा युवाओं से लेकर बुज़ुर्गों की भीड़ लगी रहती है.

गुलाब जी की चाय की ख़ास बात ये है कि वो चाय ख़ुद बनाते हैं. आप यहां आइये चाय पीजिए, बन मस्‍का खाइए. पैसे हैं तो दीजिए, नहीं हैं तो कोई बात नहीं. गुलाब जी हर दिन करीब 250 भिखारियों को फ़्री चाय भी पिलाते हैं.

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गुलाब जी ने साल 1947 में जीवन यापन के लिए 130 रुपये के साथ चाय के एक खोमचे से शुरुआत की थी. आज वो हर दिन करीब 20 हज़ार रुपये कमा लेते हैं. गुलाब जी की चाय दुकान इस कदर मशहूर है कि जयपुर राजघराने से लेकर फ़िल्मी सितारे भी उनकी चाय के शौक़ीन हैं.

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गुलाब जी हर दिन सुबह 3 बजे उठ जाते हैं. सूरज उगने से पहले वो ग्राहकों के लिए अपनी कड़क चाय के साथ तैयार रहते हैं. वो पिछले 73 सालों से चाय के साथ समोसा भी बेच रहे हैं. इस पूरी यात्रा के दौरान गुलाब जी ने कई दौर देखे.

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गुलाब जी चाय एक गिलास 20 रुपये की बेचते हैं. ये बाज़ार के दूसरे चाय वालों से महंगी ज़रूर है. इस दुकान पर आने वाले ग्राहकों के लिए उनकी चाय का स्‍वाद बेहतरीन है. वो शुद्ध दूध वाली चाय बनाते हैं जिसमें एक खास तरह का मसाला डालते हैं, जिसकी रेसिपी सिर्फ़ उन्‍हें ही पता है.

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गुलाब जी ने कहा कि 'साल 1947 में मैंने एक छोटी सी चाय की दुकान से शुरुआत की थी. तब मैंने स्‍टॉल शुरू करने में 130 रुपये ख़र्च हुए थे. उस समय मेरे लिए मुश्‍क‍िलें बहुत आईं, क्‍योंकि किसी को यह मंजूर नहीं था कि राजपूत परिवार का लड़का सड़क किनारे चाय बेचे'