भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने एक बार कहा था कि 'अगर आपको ग़रीबी से ऊपर उठना है तो शिक्षा ही एकमात्र ज़रिया है'. कलाम साहब ने ठीक ही कहा था क्योंकि शिक्षा ही है जो हमें ग़रीबी से मुक्ति दिला सकती है.

कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक तस्वीर ख़ूब वायरल हो रही थी. तस्वीर में एक छोटी सी बच्ची हाथ में खाली कटोरा लिए एक स्कूल की क्लास के बाहर छुप कर बच्चों को पढ़ते हुए देख रही है.

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एक तेलुगु न्यूज़ पेपर के मुताबिक़, ये तस्वीर हैदराबाद के 'देवल झाम सिंह गवर्नमेंट हाई स्कूल' की बताई जा रही है. हाथ में खाली कटोरा लिए क्लास के बच्चों को निहारती बच्ची की इस तस्वीर के पीछे एक कड़वा सच छुपा है, जिसे भूख कहते हैं

दरअसल, इस बच्ची का नाम दिव्या है, जो स्कूल के बच्चों की क्लास ख़त्म होने का इंतज़ार कर रही है, ताकि उसे इन बच्चों के साथ सरकारी योजना के तहत मिलने वाले 'मिड डे मील' का बचा हुआ खाना मिल सके.

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दिव्या स्कूल के पास ही झुग्गियों में रहती है. उसके माता-पिता कूड़ा बीनने और साफ़-सफ़ाई का काम करते हैं. दिव्या अपने माता-पिता के काम पर जाने के बाद रोजाना भोजन की तलाश में स्कूल पहुंच जाया करती थी.

इस तस्वीर के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बालिकाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन 'एमवी फ़ाउंडेशन' के राष्ट्रीय संयोजक वेंकट रेड्डी ने अपने फ़ेसबुक पेज पर अख़बार की ख़बर साझा करते हुए कहा कि ये शर्म की बात है कि एक मासूम बच्ची शिक्षा और भोजन के अपने अधिकार का प्रयोग नहीं कर पा रही है.

वेंकट रेड्डी ने इसके बाद अपने संगठन और क्षेत्र के अन्य स्वयंसेवकों की मदद से दिव्या को खोज निकाला और उसी स्कूल में प्रवेश दिला दिया. इसके बाद उन्होंने अपने फ़ेसबुक पेज पर स्कूल के पहले दिन दिव्या और उसके माता-पिता की एक तस्वीर साझा की. तस्वीर में दिव्या स्कूल की नई ड्रेस पहने बेहद ख़ुश नज़र आ रही है.

इसके बाद भी वेंकट रेड्डी ने अपने फ़ेसबुक पेज पर दिव्या की कई तस्वीरें शेयर की, जिनमें वो बेझिजक 'मिड डे मील' का लाभ उठा रही हैं.

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जो काम बच्चों को शिक्षा दे रहे शिक्षकों को करना चाहिए, उसके लिए वेंकट रेड्डी को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.