कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ डॉक्टर्स से लेकर हेल्थ वर्कर्स तक, हर कोई अपने-अपने स्तर पर जंग लड़ रहा है. इनके काम की जितनी सराहना की जाए उतनी कम है. आज देश अगर कुछ हद तक कोरोना संक्रमण से बच पाया है, तो वो इन लोगों की दिन रात की मेहनत का ही नतीजा है. 

डॉक्टर, नर्स व अन्य हेल्थ वर्कर्स के बीच हम उन लोगों को भूल रहे हैं जो हॉस्पिटल में रहकर तो नहीं, लेकिन देश के दूरदराज़ के इलाकों में लोगों के बीच कोरोना महामारी को लेकर जागरूकता फैलाने का काम कर रहे हैं. 

हम बात कर रहे हैं सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) और सहायक नर्स मिडवाइव्स (एएनएम) वर्कर्स की. ये लोग मीडिया के कैमरों व अख़बारों की हेडलाइन से दूर अपने काम से लोगों का दिल जीत रहे हैं. ग्रामीण भारत में कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ असल ज़मीनी लड़ाई यही लोग लड़ रहे हैं. 

ग्रामीण भारत में महामारी के ख़िलाफ़ इस लड़ाई का नेतृत्व महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की एक टीम द्वारा किया जा रहा है. पिछले कुछ समय में ये महिलाएं कोरोना वायरस से स्थानीय लोगों का बचाव करने वाली रियल हीरो के रूप में उभकर सामने आई हैं. 

इन महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ ज़मीनी स्तर पर मिलकर काम करने वाले गैर-लाभकारी संगठन 'पॉपुलेशन फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) ने इनके साहस और काम के प्रति जुनून को लेकर एक शॉर्ट फ़िल्म बनाई है. 

इस शॉर्ट फ़िल्म में आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को दिखाया गया है कि वो कैसे रोजाना दूर दराज़ के गांवों और छोटे शहरों में जाते हैं और कोरोना महामारी के प्रति लोगों को जागरूक करते हैं और अपने समुदाय के लोगों की मदद करते हैं. 

इस शॉर्ट को फ़िल्म को MyGov के फ़ेसबुक पर पेज पर रिलीज़ किया गया है. 1 मिनट 25 सेकंड की इस शॉर्ट को फ़िल्म को 24 घंटों के भीतर 4.8 मिलियन बार देखा जा चुका है. 212K से अधिक लाइक मिल चुके हैं.