एक आंकड़े के अनुसार, इस समय पूरी दुनिया में बेघर लोगों की संख्या क़रीब 7 करोड़ है. सिर पर छत न होने के कारण ये सड़कों पर सोने को मजबूर हैं. ये एक ऐसी समस्या है जिससे पूरी दुनिया जूझ रही है. लेकिन बहुत कम लोग हैं, जो इसे दूर करने के बारे में सोचते हैं. ऑस्ट्रेलिया की एक संस्था ऐसे ही बेघर लोगों को रात में सोने का इंतज़ाम करने में जुटी है. ये संस्था इन लोगों के जीवन में एक आशा की किरण बनकर आई हैं.

बेघर लोगों को बिस्तर देने का काम करने वाली इस संस्था का नाम है 'Beddown'. इस संस्था का मक़सद बेघर लोगों को चैन से रात काटने के लिए एक साफ़-सुथरी जगह मुहैया कराना है.

ऑस्ट्रेलिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके पास घर नहीं है. ऐसे लोग वहां की सड़कों पर अख़बार, पॉलीथीन, कार्टून्स(गत्ते) आदि बिछा कर ठंड में सोने के मजबूर हैं. डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसे लोगों की नींद पूरी नहीं हो पाती और वो मोटापा, अनिद्रा जैसी कई बीमारियों के शिकार हो जाते हैं.

इनकी मदद करने के लिए ही इस संस्था ने अनोखा कदम उठाया है. इसके लिए Beddown के स्वयंसेवक ब्रिस्बेन में खाली पड़े पार्किंग स्लॉट का इस्तेमाल करते हैं. ये वहां के ओनर्स से बात कर खाली जगह को बेघर लोगों के लिए रात में चैन से सोने के लिए बिस्तर लगाते हैं.

इस संस्था के चेयरमेन Norman McGillivray को ये आइडिया रात में एक खाली पार्किंग लॉट को देखकर आया था. तब उन्होंने सोचा क्यों न इस जगह का इस्तेमाल बेघर लोगों को सोने की जगह मुहैया कराने में किया जाए.

फिर क्या था उन्होंने पार्किंग ओनर्स से बात की और उन्हें 2 सप्ताह के लिए उसका इस्तेमाल करने को राज़ी कर लिया. फ़िलहाल, ये एक पायलट प्रोजेक्ट है, लेकिन इसके नतीज़े बहुत अच्छे रहे हैं.

यहां आने वाले ज़रूरतमंदों ने इसे 5 में से 4.5 रेटिंग दी है. उनका कहना है कि ये जगह साफ़-सुथरी है, साथ ही यहां उनकी नींद भी पूरी हो जाती है. यही नहीं ये संस्था इन शेल्टर्स में लोगों के लिए नर्स और डॉक्टर्स को भी भेज रही है, जो बीमार लोगों के स्वास्थ्य का ख़्याल रखते हैं.

हैं न ये कमाल का आइडिया. हमारे देश में भी कई लोग सड़कों पर सोने को मजबूर हैं. क्या हमारे यहां पर भी ऐसी पहल नहीं की जा सकती?

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