हमारे देश में आज भी न जाने कितनी परम्पराएं हैं. यहां हर 50 किमी के बाद लोगों की भाषा, खान-पान और रहन-सहन सब बदल जाता है. साथ ही हर गांव, शहर और राज्य की अपनी-अपनी मान्यताएं भी होती हैं.

तमिलनाडु के अंडमान गांव में भी एक ऐसी ही अनोखी परंपरा है, जिसे सुनकर आपको हैरानी होगी. दरअसल, इस गांव में लोगों के जूते-चप्पल पहनने पर सख्त मनाही है.  

legendnews

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब 450 किमी दूर अंडमान गांव में आपको एक भी शख़्स जूते-चप्पल पहने नज़र नहीं आएगा. गांव से बाहर किसी काम से जाना भी पड़े तो जब तक गांव की सीमा ख़त्म नहीं हो जाती लोग जूते-चप्पल हाथों में पकड़े नज़र आते हैं. 

bbc.com

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस गांव के लोग ऐसा देवी मुथियालम्मा के सम्मान में करते हैं. गांव के बड़े बुज़ुर्गों का मानना है कि देवी मुथियालम्मा हज़ारों सालों से इस गांव की रक्षा करती रही हैं. इसीलिए गांव में उनका बेहद सम्मान किया जाता है.   

sanjeevnitoday

इस गांव के लोगों की सबसे ख़ास बात ये है कि यहां पर किसी को भी जूते-चप्पल उतारकर रहने को नहीं कहा जाता, बल्कि लोग ख़ुद-ब-ख़ुद इसका पालन करते हैं. बाहर से आने वालों को भी ये परंपरा बताई जाती है, लेकिन उन पर दबाव नहीं बनाते. 

bbc.com

इस गांव के एक बुज़ुर्ग ने बताया कि गांव के पास ही कई साल पुराना एक जलाशय है. वहीं पर एक नीम के पेड़ के नीचे देवी मुथियालम्मा का मंदिर है. इस जगह पर लोग गांव में दाखिल होने से पहले अपने जूते-चप्पल उतारकर हाथ में ले लेते हैं. गांव में सिर्फ़ बीमार और बुज़ुर्ग ही जूते-चप्पल पहन सकते हैं. 

sanjeevnitoday

53 साल के आर्टिस्ट करूपय्या पांडे ने बताया कि ‘इस गांव में रहते हुए उनकी ये चौथी पीढ़ी है. हमारे पूर्वजों के बाद अब हम भी उनकी इस परंपरा को वैसे ही निभाते आ रहे हैं. 

क्या है इस परंपरा की असल कहानी? 

bhaskar

इस परंपरा के पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. गांव के लक्ष्मणन वीरभद्र का कहना था कि 70 साल पहले गांव वालों ने गांव के पास ही एक नीम के पेड़ के नीचे देवी मुथियालम्मा की मिट्टी की पहली मूर्ति स्थापित की थी. इस दौरान जब पुजारी देवी मां को गहनों से सजाने के बाद उनकी पूजा में मग्न थे, तो एक युवक जूते पहनकर मूर्ति के पास से गुज़र गया. उसी दिन वो शख्स सड़क पर गिर पड़ा और शाम होते-होते उसे काफ़ी तेज़ बुखार चढ़ गया, जो काफ़ी महीनों बाद उतरा.  

इस घटना के बाद से ही अंडमान गांव में लोग नंगे पांव रहते हैं. आज ये यहां के हमारे जीवन के तौर तरीकों में शामिल हो गया है.