भारतीय इतिहास में कई ऐसे राजा हुए हैं जिनके बहादुरी के क़िस्से हमने इतिहास की किताबों में पढ़े होंगे. इनमें से कई राजा तो ऐसे भी थे जिन्होंने ब्रिटिशों के ख़िलाफ़ जाकर अपनी प्रजा की हिफ़ाज़त की थी. इस दौरान भारत के एक राजा ऐसे भी थे जो अपनी रंगीन मिज़ाजी के लिए काफी मशहूर रहे.

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आज हम आपको एक ऐसे ही महाराजा के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी रंगीन मिज़ाजी और शानों-शौकत के बारे में सुन आप भी हैरान रह जायेंगे-

हम बात करने जा रहे हैं 'पटियाला रियासत' के महाराजा और पंजाब के वर्तमान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के दादा 'महाराजा भूपिंदर सिंह' की, जिन्होंने 8 नवम्बर 1900 से लेकर 23 मार्च 1938 तक पटियाला रियासत पर राज किया. लेकिन महाराजा भूपिंदर सिंह अपने शासन के लिए ही नहीं बल्कि अपनी भोग विलासिता वाली ज़िन्दगी के लिए भी मशहूर थे.

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कौन थे भूपिंदर सिंह?

भूपिंदर सिंह का जन्म 12 अक्टूबर 1891 पटियाला के 'मोती बाग पैलेस' में हुआ था. उनके पिता का नाम महाराज राजिन्दर सिंह जबकि माता जी का जसमीर कौर था. फुलकियां राजवंश के महाराज राजिन्दर सिंह की मौत के बाद 8 नवम्बर 1900 को भूपिंदर सिंह ने पटियाला रियासत संभाली. 38 साल तक राज करने के बाद 23 मार्च 1938 को मात्र 46 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था.

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मशहूर लेखक दीवान जरमनी दास ने अपनी किताब 'महाराजा' में भूपिंदर सिंह की ज़िंदगी से जुड़े कई क़िस्सों का ख़ुलासा किया है. इनमें से एक ये भी है कि महाराजा भूपिंदर सिंह ने पटियाला में 'लीला-भवन' नाम का महल सिर्फ़ इसलिए बनवाया था ताकि वो वहां बिना रोक टोक के अपनी भोग विलासिता वाली ज़िन्दगी जी सके.

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पटियाला के भूपेंद्रनगर जाने वाली सड़क पर बाहरदरी बाग़ के पास स्थित इस आलिशान महल के बारे में ये भी कहा जाता है कि यहां पर सिर्फ़ बिना कपड़ों के लोगों को अंदर आने की इजाज़त थी. कपड़े पहनकर जाने की इजाजत केवल महाराजा भूपिंदर सिंह को ही थी.

इसके अलावा इस किताब में ये भी लिखा गया है कि इस महल में एक ऐसा कमरा भी था जो राजा के लिए सुरक्षित था. इस कमरे की दीवारों पर चारों तरफ़ स्त्री और पुरुष की वासना की तस्वीरें लगी रहती थीं. इस कमरे में एक बड़ा स्विमिंग पूल भी हुआ करता था जिसमें 100 से अधिक महिलाएं एक साथ स्नान किया करती थीं.

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महाराजा भूपिंदर सिंहके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने 10 से ज़्यादा शादियां की थी. जिनसे उनके 88 बच्चे थे. इतिहासकारों के मुताबिक़ महाराजा की 10 अधिकृत रानियों समेत कुल 365 रानियां थीं. इन रानियों की सुख-सुविधा का महाराज पूरा ख़्याल रखते थे. हालांकि, महाराजा की रानियों के क़िस्से तो इतिहास में दफ़न हो चुके हैं, जबकि उनके लिए बनाए गए महल आज ऐतिहासिक धरोहर बन चुके हैं.

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कहते हैं कि महाराजा पटियाला के महल में रोजाना 365 लालटेनें जलाई जाती थीं. जिस पर उनकी 365 रानियों में से हर रानी का हर लालटेन पर नाम लिखा होता था. जो लालटेन सुबह पहले बुझती थी महाराजा उस लालटेन पर लिखे रानी के नाम को पढ़ते थे और फिर उसी के साथ रात गुजारते थे.

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महाराजा भूपिंदर सिंह के पास 2,930 हीरो वाला नेकलेस था, जिसमें दुनिया का सातवां सबसे बड़ा हीरा जड़ा था. इस नेकलेस का वजन लगभग 1000 कैरेट था. इस नेकलस की कुल कीमत 166 करोड़ थी. फिलहाल इस नेकलेस को बनाने वाली कंपनी कार्टियर का इस पर मलिकाना हक है.

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शराब के शौकीनों के बीच मशहूर 'पटियाला पैग' महाराजा भूपिंदर सिंह की ही देन है. महाराजा भूपिंदर सिंह क्रिकेटर भी थे उन्होंने 27 फ़र्स्ट क्लास मैच भी खेले थे.