केरल में विस्फ़ोटक भरा अनानास खाने से प्रेग्नेंट हथिनी की मौत हो गई थी, लेकिन पटना के दो हाथियों को उसके मालिक ने करोड़पति बना दिया है.  

देशभर में जहां एक तरफ कई लोग हाथियों को मारकर उसकी खाल और दांत की तस्करी कर अपनी संपत्ति बनाने में जुटे हैं. वहीं पटना के जानीपुर के रहने वाले 50 वर्षीय मोहम्मद अख़्तर ने अपनी 5 करोड़ ज़मीन अपने दो हाथियों के नाम कर इंसानियत की मिसाल पेश की है. 

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दरअसल, मोहम्मद अख़्तर 12 साल की उम्र से ही हाथियों की सेवा कर रहे हैं. इस दौरान उन्हें बेज़ुबान जानवरों से इस कदर प्यार हो गया कि उन्होंने हाथी पालने का मन बना लिया. अख़्तर के पास 20 साल का मोती और 15 साल की रानी नाम के दो हाथी हैं.   

इन दोनों हाथियों के लिए अपना सब कुछ त्याग करने वाले अख़्तर को लोग 'हाथी वाला' कहकर भी पुकारते हैं. इनके लिए परिवार हो या समाज, सब कुछ ये हाथी ही हैं. अख़्तर हाथियों के संरक्षण वाली 'एरावत संस्था' के मुख्य प्रबंधक भी हैं. इनका पूरा जीवन हाथियों के लिए ही समर्पित है. 

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मोहम्मद अख़्तर के मुताबिक़, मेरा बेटा ग़लत रास्ते पर चला गया था, इसलिए उसे जायदाद से बेदख़ल कर अपनी आधी संपत्ति पत्नी के नाम जबकि अपने हिस्से की जायदाद दोनों हाथियों के नाम कर दी है. अख़्तर ने रजिस्ट्री ऑफ़िस जाकर दोनों हाथियों के नाम के दस्तावेज़ भी बनवा लिए हैं. 

मोहम्मद अख़्तर आगे कहते हैं कि, अपनी पूरी जायदाद हाथियों के नाम कर देने के बाद अगर मुझे कुछ हो भी जाता है, तो सारी संपत्ति 'एरावत संस्था' के नाम हो जाएगी, ताकि इन हाथियों का संरक्षण हो और इन्हें तस्करों से बचाया जा सके.  

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हाथियों ने मुझे जानलेवा हमले से बचाया था 

मोहम्मद अख़्तर बताते हैं कि, एक बार मुझ पर जानलेवा हमले का प्रयास किया गया था, इस दौरान एक हाथी ने मुझे बचा लिया था. बदमाश हाथ में पिस्तौल लेकर मुझे मारने के लिए मेरे कमरे की तरफ़ बढ़ रहे थे, तभी हाथी उन्हें देखकर चिंघाड़ने लगा. इसी बीच मेरी नींद खुल गई और मैंने शोर मचाया तो बदमाश भाग गए.

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बेटे ने जायदाद लिए पहुंचाया था जेल 

बेटे को जायदाद से बेदखल करने के पीछे की वजह बताते हुए अख़्तर कहते हैं कि, जायदाद के चक्कर में मेरे बेटे ने अपनी ही प्रेमिका के साथ दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाकर मुझे जेल भिजवा दिया था. मगर जांच में ये बात ग़लत साबित हुई. दरअसल, मेरा बेटा मेराज ने पशु तस्करों से मिलकर हाथी बेचने की कोशिश की थी, लेकिन वो पकड़ा गया. इसलिए अब मैंने अपनी पूरी जायदाद इन्हीं हाथियों के नाम कर दी है. 

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ये दोनों हाथी मेरे दिल के बेहद क़रीब हैं. मेरे परिवार की तरह हैं. अगर भविष्य में इन दोनों हाथियों के साथ कोई भी दुर्घटना होती है तो मेरे परिवार के किसी भी सदस्य को कुछ भी नहीं मिलेगा. इसीलिए मैंने इन हाथियों की जान बचाने के लिए अपनी सारी संपत्ति इनके नाम कर दी है.  

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10 साल से परिवार से हैं अलग़ 

 50 वर्षीय मोहम्मद अख़्तर पिछले 10 साल से अपनी बीवी और बच्चे से अलग रह रहे हैं. पारिवारिक विवाद की वजह से 10 साल पहले उनकी पत्नी दो बेटे और बेटी के साथ घर छोड़कर चली गई थी. अपने बड़े बेटे मेराज को ग़लत रास्ते पर जाते देख उसे जायदाद से बेदखल कर दिया है. जबकि पत्नी के नाम आधी जायदाद लिख दी है. वहीं अपने हिस्से की लगभग 5 करोड़ रुपए की जायदाद, खेत-खलिहान, मकान, बैंक बैलेंस सभी दोनों हाथियों के नाम कर दी है.