ग्लोबल वॉर्मिंग के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन इन सभी कारणों के लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ इंसान ज़िम्मेदार है. हमने दुनिया की हर चीज़ को इस्तेमाल करने की सारी हदें पार कर दी हैं. अपनी ख़ुशी के लिए इंसानों ने न सिर्फ़ ख़ुद की बल्कि बेज़ुबान जानवरों की ज़िंदगी को भी ख़तरे में डाल दिया है.

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प्लास्टिक की थैलियों या तारों में लिपटे समुद्री जीव, तट पर मरी हुई व्हेल मछलियां या फिर अपने बर्फ़ीले घर से दूर शहर में भूख से तड़पता ध्रुवीय भालू. ये सारी तस्वीरें आपने इंटरनेट पर देखी ही होंगी. ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण आज पक्षियों की कई प्रजातियों विलुप्त हो चुकी हैं.

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आगे आप जो तस्वीर देखने वाले हैं, वो इंसानों की एक कड़वी सच्चाई को बताने जा रही है. ये आपको आवाक छोड़ देगी. आपको जो महसूस होगा वो है शर्म, अफ़सोस और बहुत सारा दुख. उस नन्हें बच्चे के लिए जो हमारी बनाई दुनिया में एक दाने के लिए भी जूझ रहा है. सोचिए कि ये तो सिर्फ़ एक तस्वीर है. ठीक इस वक़्त जब आप इस एक तस्वीर के बारे में सोच रहे हैं, दुनिया में हज़ारों ऐसे छोटे बच्चे जीने की लड़ाइयों में उलझे होंगे.

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नेशनल ऑडोनोन सोसाइटी के लिए वॉलिंटियर के तौर पर काम करने वाली मशहूर फ़ोटोग्राफ़र Karen Mason ने इस तस्वीर को क्लिक किया है. Mason ने इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर किया ताकि इंसानों को अपनी इस ग़लती पर शर्म आ सके. उन्होंने अपने फ़ेसबुक पेज पर इस तरह की कई अन्य तस्वीरें भी शेयर की हैं.

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'सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ' ने हाल ही में अपने एक कैंपेन में पाया कि हर साल करीब 5.5 ट्रिलियन सिगरेट के फ़िल्टर यूं ही फेंक दिए जाते हैं. ये टुकड़े वातावरण को नुकसान पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

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सिगरेट पीकर उसके टुकड़ों को खुले में फेंकना सिर्फ़ मानवता के लिए ही नहीं, बल्कि जीव-जंतुओं के लिए भी हानिकारक है. इसलिए प्लीज़ इंसानियत का फ़र्ज़ निभाते हुए बेज़ुबान जानवरों को बख़्श दें.