चुनावों के बाद जब-जब नई सरकार आई है, उसने अपने हिसाब से लोगों को इतिहास और उससे जुड़े फ़ैक्ट्स बताने की कोशिश की है. इसमें रही-सही कसर सोशल मीडिया और WhatsApp पर आने वाले वो मैसेज पूरी कर देते हैं, जिनका काम ज्ञान बांटना कम और अफ़वाहों को जन्म देना ज़्यादा दिखाई देता है. इस सब के बीच एक सवाल उठता है कि यदि आप इतिहास को जानने के इच्छुक हैं, तो आखिर किस पर विश्वास करें? क्योंकि यहां फ़ैक्ट्स कम और मिथ ज़्यादा दिखाई देता है.

स्कूल के दिनों में लिखा वो लेख, तो आपको याद ही होगा, जिसका शीर्षक होता था ‘किताबें मेरी दोस्त’. आज भी आपकी यही दोस्त आपको हिस्ट्री के करीब ले जाती है, जिनमें फ़ैक्ट्स के साथ किसी भी तरह के छेड़छाड़ की कोई गुंजाईश नहीं ही नहीं होती. आज हम आपके लिए कुछ ऐसी ही किताबें ले कर आये हैं, जो नेताओं की बकवास को दूर करने के साथ ही भारत के इतिहास से आपका परिचय कराएंगी.

डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा लिखित ‘डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया’ को आप आधुनिक भारत को दर्शाती पहली किताब भी कह सकते हैं. इसमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम का आंखों देखा वर्णन है, जिसे नेहरू ने अहमदनगर किले में अपने जेल प्रवास के दौरान उतारा था.

India After Gandhi

प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा की किताब ‘India After Gandhi’ आज़ादी के बाद भारत के हालातों को लोगों के सामने रखती हुई दिखाई देती है. इस किताब को पढ़ कर आप उन सब मुद्दों की तह तक जा सकते हैं, जो सालों से सुर्ख़ियों में रहने के बावजूद आज तक सुलझती हुई नहीं दिखाई देती. इस किताब में इमरजेंसी के हालातों के साथ ही बाबरी मस्जिद विध्वंस और कश्मीर समस्या पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है.

In The Name Of Democracy

जेनयू के पूर्व प्रोफ़ेसर और इतिहासकार बिपिन चंद्रा भारतीय इतिहास पर कई किताबें लिख चुके हैं. ‘In The Name Of Democracy’ में उन्होंने उन राजनीतिक हालातों को दिखाने की कोशिश की है, जिन्हें भारतीय इतिहास को बदलने वाला क्षण भी कहा जा सकता है. इसमें 1970 की इमरजेंसी और जे.पी. आंदोलन भी शामिल है.

One Life is Not Enough

पूर्व IFS और विदेश मंत्री नटवर सिंह ने अपनी ऑटोबायोग्राफी ‘One Life is Not Enough’ में नेहरू परिवार की विस्तार से चर्चा की है. इस चर्चा में उन्होंने भारत के दो प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या के दौरान परिवार की स्थिति और उस समय के राजनीतिक हालातों के विषय में लिखा है.

India’s Struggle For Independence

बिपिन चंद्रा की इतिहास पर पकड़ का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सिर्फ़ आज़ादी के बाद ही नहीं, बल्कि आज़ादी से पहले के हालातों पर भी किताबें लिखीं. उनके द्वारा लिखी गई ‘India’s Struggle For Independence’ आज मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री में मील का पत्थर माना जाता है. इसकी शुरुआत 1857 की चिंगारी से होती है, जिसके बाद महात्मा गांधी का भारत आगमन और कांग्रेस उदय पर चर्चा की गई है.8