भारत के वैभव से प्रभावित होकर ही अंग्रेज़ों ने इस धरती पर अपना कदम रखा था यहां के कई सपूतों ने हिन्दुस्तान का परचम पूरे विश्‍व में लहराया. यूं तो देश में कई रियासतें थीं, सभी की अपनी अलग पहचान थी. मगर एक रियासत ऐसी थी, जहां के राजा ने अपने सामने अंग्रेजों को कुछ नहीं समझा. भारत को गुलाम बनाने वाले अंग्रेज शासकों ने भी इस भारतीय राजा से कर्ज़ लिया. वो भी थोड़ा-बहुत नहीं, पूरे एक करोड़ रुपये का. भारतीय राजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय से जुड़े भारतीय रेलवे के एक ऐसे ही इतिहास के बारे में रू-ब-रू करवाने जा रहे हैं.

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मध्य भारत के महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय ऐसे शासक थे, जिन्होंने रेलवे से होने वाले लाभ को समझते हुए अंग्रेज़ों को 1 करोड़ रुपये का कर्ज़ दिया. इस राशि की मदद से अंग्रेजों ने 1869 में खंडवा-इंदौर रेलवे लाइन का निर्माण किया. इस लाइन को होलकर स्टेट रेलवे भी कहा जाता था.

101 साल तक के लिए दिया था कर्ज़

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महाराज ने यह कर्ज़ 101 वर्ष के लिए 4.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर दिया गया था. इसके अलावा पटरी बिछाने के लिए अंग्रेज़ों को मुफ़्त में जमीन भी दी गई थी.

हाथियों से मदद ली गई थी

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-तस्वीरों की मदद से आप रेलवे निर्माण के बारे में समझ सकते हैं. इंदौर में टेस्टिंग के लिए पहला रेलवे इंजन हाथियों द्वारा खींचकर ट्रैक तक लाया गया था. इस संबंध में 5 मई 1870 को शिमला में वायसरॉय और गर्वनर जनरल की काउंसिल के समक्ष इस समझौते पर मुहर लगाई गई थी.

अंग्रेजों से जुड़ा हिन्दुस्तान का इतिहास कुछ भी हो, मगर अंग्रेज़ों को दिया हुआ 1 करोड़ रुपये का कर्ज़ हमारे लिए गर्व की बात है. एक बात सबसे महत्वपूर्ण यह है कि भारतीय रेलवे के लिए भी यह एक ऐतिहासिक घटना है.