आज हम पैसे और नाम कमाने में इतना व्यस्त हो गए हैं कि हम कई ज़रूरी चीज़ों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं. उन ज़रूरी लोगों को जिन्होंने हमें इस लायक बनाया. वो जिन्होंने नई शर्ट नहीं खरीदी क्योंकि हमें स्कूल की ट्रिप पर जाना था. वो जो हमारी बेफ़िज़ूल की डिमांड को अपनी मूलभूत ज़रूरत के आगे रखते थे. ये और कोई नहीं हो सकते, सिवाए मां-बाप के.

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आज शेफ़ विकास खन्ना ने फेसबुक पर अपने पिता के ​बारे में ऐसी ही कुछ बातें लिखीं, जो हम सबके लिए एक बड़ी सीख हैं. 31 जनवरी 2015 को विकास के पिता का निधन हो गया था, उन्हीं की याद में उन्होंने लिखा कि-

31 जनवरी, 2015 को रोज़ की तरह मैंने सुबह घर पर फ़ोन किया, अपने माता-पिता से बात करने के लिए. पापा दो चीज़ों के लिए बहुत खुश थे, पहली कि Australian Open के फ़ाइनल में Serena Williams खेल रही हैं और दूसरा ये कि Mercedes ने मुझे ए​सोसिएशन के लिए साइन किया था. उन्होंने मुझे बताया कि उनका सपना है मेरी Mercedes चलाने का. मैंने हंसते हुए पूछा, तो ये आपने पहले क्यों नहीं बताया? तो उन्होंने कहा ‘तुमने पूछा ही नहीं’. हमने हंसते हुए फ़ोन रख दिया. उसी दिन दोपहर में उनका​ निधन हो गया. कोई भी औलाद ऐसी परिस्थिति के लिए कभी तैयार नहीं होती. आपको खाली सा लगने लगता है. मैं आज भी सोचता हूं उस लाइन के ​बारे में कि ‘तुमने पूछा ही नहीं’. काश मैं उनके लिए कुछ और कर पाता, उनकी सारी इच्छाएं पूरी कर पाता और वो गर्व महसूस कर पाते.जीवन का सबक- किसी पल का इंतज़ार न करो. हमारे माता-पिता शायद हमसे कभी कुछ न मांगें और अपना सब कुछ हमें दे दें. उनके लिए हमेशा कुछ न कुछ करो, उन्हें प्यार करो, गले लगाओ, उनके सपनों के बारे में पूछो क्योंकि एक दिन आप सैकड़ों कारें तो खरीद सकते हैं, ​लेकिन वक़्त कभी खरीद नहीं पाएंगे. (ये अनुवाद है, पूरा पोस्ट यहां पढ़ें)

हम खुशी कमाने निकलते हैं, खुशियों को नज़रअंदाज़ कर के.