दो साल पहले 35 साल के कार्तिक के पड़ोस में हेड कॉन्स्टेबल पी. सेंथिल कुमार रहने आए थे. तब कार्तिक ने सोचा भी न था कि एक दिन वो ही उनकी बेटी के लिए तारणहार बनकर आएंगे.

सेंथिल कुमार चेन्नई के नंदाबक्कम पुलिस स्टेशन में काम करते हैं. उन्होंने और दूसरे पुलिस वालों ने मिलकर कार्तिक की बेटी के ऑपरेशन के लिए 5 लाख रुपये जमा कर उसकी जान बचाई है. 

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दरअसल, कार्तिक की 5 साल की बेटी कविष्का को दिल की बीमारी है. उसकी 3 बार ओपन हार्ट सर्जरी हो चुकी है. चौथी बार भी डॉक्टर्स ने उन्हें बेटी की सर्जरी कराने की सलाह दी थी. 

कार्तिक एक सेल्समैन हैं जो चेन्नई की एक इलेक्ट्रानिक्स शॉप में काम करते हैं. लॉकडाउन होने के चलते उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. इसलिए वो सर्जरी को बार-बार टाल रहे थे. उनकी बेटी की हालत के बारे में जानने के बाद सेंथिल कुमार ने उन्हें 30 हज़ार रुपये दिए ताकि वो इलाज करा सकें.

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मगर उन्हें पता चला कि कविष्का के ऑपरेशन के लिए 5 लाख रुपये की ज़रूरत है. इस बात को उन्होंने पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर एम. थंगराज से शेयर किया. इसके बाद सभी पुलिस वालों ने मिलकर 45 हज़ार रुपयों को इंतज़ाम कर लिया. 1.25 लाख रुपये राज्य सरकार की एक स्कीम के तहत बच्ची के इलाज के लिए मिल गए और बाकी के पैसे दूसरे दानकर्ताओं से जमा किये गए.

इसके बाद 15 दिनों पहले नंदाबक्कम के एक हॉस्पिटल में कविष्का का ऑपरेशन हुआ. बीते शनिवार को ही वो स्वस्थ होकर अपने घर लौटी है. जब तक वो हॉस्पिटल में थी पुलिस वाले नियमित रूप से उससे मिलने जाते थे.

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कार्तिक ने इस बारे में बात करते हुए कहा- 'जब मैं छोटा था तो पुलिस को लेकर मेरा अनुभव बहुत कड़वा था. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन यही पुलिस मेरी बेटी की जान बचाएगी.' 

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