जापान में घरों में डरुमा डॉल रखने की परंपरा है. ये एक अजीब सी दिखने वाली गुड़िया होती है. ऐसा कहा जाता है कि इसे घर में रखने से लोगों के लक्ष्य पूरे हो जाते हैं, यही कारण है कि इसे ‘Goal Doll’ भी कहा जाता है.

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ये डॉल दिखने में काफ़ी अजीब सी होती है. गोल आकार की इस गुड़िया के हाथ और पैर भी नहीं होते. इसकी दाढ़ी और मूछें होती हैं. आंखों की जगह केवल खाली गोले होते हैं, जिनमें पुतलियां भी नहीं होतीं.

इसे घर में रखना बेहद शुभ माना जाता है. ये बोधिधर्मा का प्रतीक मानी जाती है, जो कि चीन में ज़ेन बुद्धिज़्म के संस्थापक हैं.

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इसे घर में रखने के पीछे मान्यता है कि इसे रखने से मनोकामनाएं और लक्ष्य पूरे होते हैं. इसे घर में लाने के बाद कोई लक्ष्य निर्धारित करना होता है. लक्ष्य निर्धारित करने के बाद, काली स्याही से इस डॉल की दाहिनी आंख बना दी जाती है.

अब डॉल को किसी ऐसी जगह रख दिया जाता है, जहां बार-बार इस पर नज़र पड़े. इससे लोगों को उनका लक्ष्य याद आता रहता है. जब लक्ष्य पूरा हो जाता है, तो डॉल की दूसरी आंख भी बना दी जाती है. कुछ लोग तो गुड़िया के पीछे अपना लक्ष्य भी लिख देते हैं.

ये डॉल Paper Mache से बनी होती है. ये अन्दर से खोखली और गोल होती है. इसे इस तरह बनाया जाता है कि अगर ये गिर भी जाये, तो दोबारा सीधी हो जाये. इसके लिए इसके तले में वज़न रख दिया जाता है.

ये डॉल ये भी सिखाती है कि हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए और अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहना चाहिए. इस डॉल का पारंपरिक रंग लाल होता है. लाल रंग को सफ़लता और जीत का प्रतीक माना जाता है. अब ये डॉल्स अन्य रंगों में भी आने लगी हैं.

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ऐसा माना जाता है कि इस गुड़िया की शक्तियां केवल एक साल तक ही रहती हैं. अगर एक साल के अन्दर लक्ष्य पूरा नहीं होता है, तो डॉल को मंदिर ले जाया जाता है और इसे जला दिया जाता है.

डॉल को जलाना एक शुद्धिकरण की प्रक्रिया है. इससे लक्ष्य अगले साल ज़रूर पूरा हो जाता है. इन्हें जलाने के लिए नए साल के बाद एक ख़ास रस्म रखी जाती है. इसके बाद नयी डॉल खरीद कर दोबारा कामना की जाती है.