Please Do Not Sit On The Floor!

कृपया मेट्रो में ज़मीन पर न बैठें…

इस अनाउंसमेंट से वो लोग अच्छी तरह से वाक़िफ़ होंगे, जो दिल्ली मेट्रो में सफ़र करते हैं. ये अनाउंसमेंट आप अपने 1 घंटे के सफ़र में कई बार सुनते हैं. मगर इस बात को मानते कुछ ही लोग हैं. कुछ लोग तो थक कर मेट्रो में चढ़े और जगह न मिलने पर फटाक से नीचे बैठ गए. नीचे बैठना भले ही आपको अजीब न लगे, क्योंकि बैठना कोई ग़लत थोड़ी होता है. 

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ये सही बात है, लेकिन आप जैसे ही नीचे बैठते हैं वैसे ही मेट्रो के नियमों के ख़िलाफ़ चले जाते हैं. इसके अलावा तकनीकी समस्या भी होने का डर रहता है. एक बार मुझे भी नीचे बैठने के चक्कर में 250 रुपये देने पड़ गए थे. जबकि मुझे मेट्रो में चढ़े ढाई मिनट भी नहीं हुए थे.

आइए और भी वजह बताती हूं मेट्रो के फ़्लोर पर न बैठने की:

1. मेट्रो के कोच को प्रति वर्ग मीटर 25 लोगों के लिए बनाया गया है ये ट्रेन के बैलेंस को ध्यान में रखते हुए किया गया है. क्योंकि ट्रेन जब घुमावदार एलिवेटेड ट्रैक पर होती है, तो इससे समस्या खड़ी होती है और इसलिए ट्रेन की स्पीड कम करनी पड़ती है.

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2. जब व्यक्ति फ़र्श पर बैठता है तो वो ज़्यादा जगह लेता है उस व्यक्ति से जो फ़र्श पर खड़ा होता है. इससे जगह काफ़ी कम लगती है.

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3. फ़र्श में जितनी जगह में एक व्यक्ति बैठता है उतनी जगह में तीन लोग खड़े हो सकते हैं.

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4. नीचे बैठने से लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

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5. इससे मेट्रो ओवरलोड भी हो सकती है क्योंकि अगर सिर्फ़ सीटों पर बैठते हैं, तो लोगों की संख्या उतनी ही होगी जितनी मेट्रो की क्षमता है. नीचे बैठने पर ओवरलोड हो जाती है.

6. अगर आपने अचानक अपने पैर फैलाए, तो कोई यात्री आपके पैरों में फंसकर गिर सकता है. 

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7. जब मेट्रो आती है उस वक़्त सब जल्दी में होते हैं इससे नीचे बैठे लोगों को चोट भी लग सकती है.

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8. मेट्रो में सफ़ाई करने वालों को भी आपके नीचे बैठने से सफ़ाई करने में दिक्कत होती है.

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9. नीचे बैठना आपकी सेहत के लिए भी अच्छा नहीं होता. क्योंकि पता नहीं किसके पैर में क्या लगा हो और आप वहीं पर बैठ जाते हैं.

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अगर सीट पर बैठना है, तो या तो जल्दी निकलिए या फिर किसी के उठने का इंतज़ार करिए.

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