आप सभी ने ट्रेन में सफ़र तो किया ही होगा. अगर आपने कभी गौर किया हो तो ट्रेन के हर डिब्बे के ऊपर 5 अंकों का एक नंबर लिखा होता है. देखा हर किसी ने होगा लेकिन क्या आप इसका मतलब जानते है? क्या आपने कभी इस नंबर के बारे में जानने की कोशिश की? नहीं तो चलिए हम बताते हैं.   

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ट्रेन के हर कोच पर मुख़्य रूप से 5 अंकों की संख्या लिखी होती है. जिसमें से शुरू की दो संख्या निर्माण के वर्ष की जानकारी देते हैं. 

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उदाहरण के लिए जैसे- 03230 जिसका मतलब है 2003 में निर्मित कोच, 07052 जिसका मतलब है 2007 में निर्मित कोच, या फिर 97132 जिसका मतलब है 1997 में निर्मित कोच. 

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अब आप सोच रहे होंगे शुरू के दो नंबरों के बारे में तो बता दिया. आख़िर के तीन नंबरों का मतलब क्या? तो चलिए आपको आख़िर के तीन नंबरों का मतलब भी समझा देते हैं.   

001 - 025: AC प्रथम श्रेणी पर, वर्ष 2000/2001 के कुछ डिब्बें या कोच


026 - 050: 1 AC+ एसी - 2 T

051 - 100: AC - 2T यानि कि एसी 2 टियर

101 - 150: AC - 3T यानि कि एसी 3 टियर

151 - 200: CC यानि कि एसी चेयर कार

201 - 400: SL यानि कि द्वितीय श्रेणी स्लीपर

401 - 600: GS यानि कि सामान्य द्वितीय श्रेणी 

601 - 700: 2S यानि कि द्वितीय श्रेणी सिटिंग/जन शताब्दी चेयर कार

701 - 800: SLR (सिटिंग कम लगेज रैक)

801+: पैंट्री कार, वीपीयू, आरएमएस मेल कोच, जनरेटर कार आदि...

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दरअसल, जिस ट्रेन का पहला नबंर 0 से शुरू होता है, वो स्पेशल ट्रेन होती है. ये ख़ास तौर पर समय या फिर होली के मौके पर चलती हैं. वहीं अगर बात करें AC ट्रेनों की, जिनकी शरुआत 1 नबंर से होती है, वो थोड़ी लंबी दूरी के लिए होती हैं. इसके अलावा नबंर 2 वाली ट्रेन ज़्यादा लंबी दूरी के लिए होती है. 3 नंबर वाली ट्रेन कोलकाता सब अर्बन ट्रेन के बारे में बताती हैं.