आपने ग्रीन मॉल, ग्रीन बिल्डिंग/पुलिस स्टेशन के बारे में सुना होगा. पर क्या आप जानते है भारत को उसका पहला ग्रीन होम कब मिला और कैसे मिला? इसके बारे में हम आज आपको विस्तार से बताएंगे. ये घर बना है दिल्ली के चितरंजन पार्क में, जिसका नाम है ग्रीन वन.

ये एक चार मंज़िला घर है, जो क़रीब 2,842 Sq. Ft में फैला है. ये भारत का पहला सर्टिफ़ाइड ग्रीन होम है. इसे SVAGRIHA (Simple Versatile Affordable – Green Rating For Integrated Habitat Assessment) ने पूरी 5 स्टार रेटिंग दी है.

India’s First Certified Green Home
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साल 2013 में इस घर ने ये ख़िताब हासिल किया था. इसके मालिक हैं प्रसंतो रॉय. वो एक टेक्नोलॉजी जर्नलिस्ट हैं. इन दिनों वो साइबर मीडिया नाम की एक टेक कंपनी के मालिक हैं. उनके गुरुग्राम के ऑफ़िस के पास ही एक ग्रीन बिल्डिंग बन रही थी. इसे देख कर उन्होंने ऐसी तकनीक से ही अपना घर बनाने के बारे में सोचा.

नहीं मिले थे शुरुआत में बिल्डर्स

India’s First Certified Green Home
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इसके बाद रॉय ने ग्रीन होम के बारे में बहुत रिसर्च की. उनका सपना था कि वो भी एक दिन ऐसा ही घर बनाएंगे. इस तरह उन्होंने अपने चितरंजन पार्क वाले पुश्तैनी घर को ग्रीन होम में तब्दील करने की ठानी. इसके लिए उन्होंने कई बिल्डर्स से संपर्क किया. मगर उन्हें कोई इस तरह का घर बनाने वाला नहीं मिला. फिर उन्होंने अपने बचपन के दोस्त नीलांजन भोवल से संपर्क किया. वो एक वास्तुकार हैं.

India’s First Certified Green Home owner
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इसे बनाने के लिए दोनों ने The Energy Resources Institution (TERI) से संपर्क किया. ये संस्था इस तरह के घर को बनाने और उनके लिए पंजीकरण करने का काम करती है. यहां आकर रॉय ने इस घर को बनाने के सारे पहलुओं को ग़ौर से समझा. सबसे बड़ी बात ये थी कि इस तरह के घर को बनाने के लिए पंजीकरण शुल्क 5 लाख रुपये था.

पंजीकरण शुल्क था बहुत अधिक

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शायद यही वजह थी कि लोग ऐसे घर बनाने से बचते हैं. इसलिए उन्होंने मिलकर संस्था को समझाया कि इस शुल्क को कम कर वो ग्रीन होम बनाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर सकते हैं. दोनों दोस्त इसमें भी कामयाब रहे. अब उन्होंने 5 लाख की जगह 1 लाख रुपये में पंजीकरण कराया और अब ये घटकर 50 हज़ार रुपये हो गया है. 2011 में उन्होंने अपने घर को बनाने की शुरुआत की.

54 फ़ीसदी हिस्से में नेचुरल लाइट रहती है

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इसे बनाने में 2 साल का समय लग गया और इसकी लागत क़रीब 4 करोड़ रुपये आई. इस घर को बनाने में मिट्टी की नहीं फ़्लाई ऐश की ईंटों का इस्तेमाल हुआ है. ये कंकरीट जितनी ही मज़बूत होती है और इससे घर को ठंडा रखने में भी मदद मिलती है. इसे घुमावदार बनावट में बनाया गया है ताकि घर में अधिकतम रोशनी और छाया रह सके. इसके 54 फ़ीसदी हिस्से में नेचुरल लाइट रहती है. इससे बिजली का बिल भी कम आता है.

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इस घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी है. इससे गंदे पानी को रिसाइकिल कर बालकनी में लगे पौधों में डाला जाता है. यही नहीं बिजली के लिए घर की छत पर सोलर पैनल भी लगाए गए हैं. गर्मी से बचने के लिए छत की दीवारों पर हाई सोलर रिफ़्लेक्टिव पेंट लगा है, ये घर को ठंडा रखने में हेल्प करता है.

मिली है 5 स्टार रेटिंग

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इसे TERI ने 5 स्टार रेटिंग दी है और ग्रीन वन ने अलग-अलग मापदंडों के हिसाब से 96 अंक प्राप्त किए हैं. आप भी चाहें तो ऐसा घर बना सकते हैं. TERI ने इसके लिए एक App भी बनाई है, जिसमें ग्रीन होम बनाने से जुड़ी सारी जानकारी है. यही नहीं ये लोग इसे बनाने आपकी हर संभव मदद भी करने को तैयार रहते हैं.

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