आज़ाद भारत का पहला चुनाव 1952 में हुआ था, लेकिन मतदान 1951 में और तब हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले में रहने वाले श्याम शरण नेगी ने सोचा भी नहीं होगा कि वो आज़ाद भारत के पहले वोटर बनकर इतिहास रच देंगे. बीते कुछ सालों में श्याम शरण नेगी जितनी बार भी वोट देने गए हैं पूरी मीडिया की नज़रें उनपर होती हैं और उनको किसी वीआईपी से कम नहीं समझा नहीं जाता है.

amarujala

Hindustan Times के अनुसार, 102 साल की उम्र में भी श्याम शरण नेगी हर चुनाव में वोट डालने ज़रूर जाते हैं, चाहे वो लोक सभा इलेक्शन हों, असेंबली एलेक्शंस होना या ग्राम पंचायत के चुनाव. और अब 2019 के आने वाले लोकसभा चुनावों में भी वो वोट डालने जाएंगे.

navodayatimes

पर शायद कुछ ही लोगों को ही पता होगा कि साल 2007 के जुलाई महीने में चुनाव आयोग द्वारा आज़ाद भारत के पहले मतदाता को ट्रैक करने के 45 साल पहले तक नेगी गुमनामी के अंधेरों में ही थे. चुनाव आयोग को नेगी के बारे में तब पता चला जब भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी मनीषा नंदा, जो अब हिमाचल प्रदेश में अतिरिक्त मुख्य सचिव (सार्वजनिक निर्माण विभाग) हैं, को सबसे पहले फ़ोटो मतदाता सूची से नेगी के बारे में पता चला.

मनीषा नंदा ने HT को बताया, ‘मुझे किन्नौर में बहुत अधिक रुचि थी क्योंकि मुझे पता था कि देश में अन्य स्थानों के अलावा बर्फ से घिरे इस क्षेत्र में भी मतदान होता है. एक दिन, मेरे पास एक फ़ोटो मतदाता सूची आई, जिसमें 90 वर्ष से ज़्यादा की उम्र के भी वोटर्स थे. इनमें भी नेगी जी की उम्र ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा और मैंने चुनाव विभाग के अधिकारियों से 92 वर्षीय नेगी से मिलने के लिए कहा, उस वक़्त उनकी उम्र 92 साल थी.’ 

patrika

एम सुधा देवी एम, 2003 बैच की आईएएस ऑफ़िसर, तब किन्नौर के डिप्टी कमिश्नर के रूप में तैनात थीं, नेगी से मिलने गई जो कल्पा के प्रतिष्ठित गांव के लोगों में से एक थे. श्याम शरण नेगी जी ने सुधा देवी को बताया,

वो स्वतंत्र भारत के पहले मतदाता थे और अपनी पूरी ज़िन्दगी में उन्होंने अभी तक हर इलेक्शन में वोट डाला है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने कड़ाके की सर्दियों और बर्फ़बारी को देखते हुए किन्नौर ज़िले में पहले मतदान कराया था.
livehindustan

1 जुलाई, 1917 को पैदा होने वाले नेगी तब एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और पहले चुनाव में उन्हें चुनाव में ड्यूटी दी गई थी.

bbc

नेगी जी के बेटे चन्दर प्रकाश(53) ने कहा,

मेरे पिता ने पोलिंग पार्टी से अनुरोध किया था कि वो उन्हें वोट डालने की अनुमति दें और फिर वो मतदान केंद्र पर चले जाएंगे जहां उन्हें ड्यूटी दी गई थी. संबंधित अधिकारी ने उनके अनुरोध को स्वीकार किया और वो देश के पहले मतदाता बन गए.’

श्याम शरण नेगी के दावे की पुष्टि करने के बाद, सुधा देवी ने मनीषा नंदा को सूचित किया, जिन्होंने चुनाव कार्यालय में इस रिकॉर्ड की खोज की शुरुआत की थी. 

इसके साथ ही मनीषा नंदा ने कहा कि,

 ‘हमने चार महीनों तक रिकार्ड्स और फ़ाइल्स खोजीं. इतना ही नहीं चुनाव आयोग ने भी नई दिल्ली में अपने मुख्यालय में इन रिकार्ड्स की खोज की. पहले मतदाता का पता लगाने का मेरा अनुभव इस विषय पर पीएचडी पूरा करने जैसा था.’ 

2012 में, तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त, नवीन चावला किन्नौर के कल्पा गांव में नेगी के घर उनकी सुविधा देने के लिए पहुंचे थे.

2014 के चुनावों के दौरान, Google ने नेगी जी को फ़ीचर करते हुए ‘Pledge to Vote Campaign’ का एक वीडियो बनाया था. उस साल इस वीडियो को इस वीडियो को एक ही मुहिम के तहत लॉन्च किए गए अमिताभ बच्चन, दीया मिर्ज़ा, अर्जुन रामपाल और क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग जैसी मशहूर हस्तियों के वीडियो से ज़्यादा व्यूज़ मिले थे.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2017 के विधान सभा चुनाव में मतदान केंद्र पर श्याम शरण नेगी जी के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया था और मतदान केंद्र पर उनका स्वागत खुद जिला मतदान अधिकारियों ने किया था. इससे भी बड़ी बात ये है कि 100 साल की उम्र तक नेगी जी ने अबतक सभी 16 लोकसभा चुनावों और 14 विधानसभा चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है. इस तरह से वो अब तक 31 बार मतदान कर चुके हैं. 

zeenews

गौर करने वाली बात ये हैं कि देश में जब 1952 में पहली बार चुनाव हुए थे, लेकिन नेगी ने 25 अक्टूबर 1951 में पहला वोट डाला था. भारी बर्फ़ गिरने के कारण हिमाचल प्रदेश के ऊपरी हिस्सों में जनवरी-फरवरी में तो घर से निकलना ही मुश्किल होता है, इसलिए उन इलाकों में 1951 में अक्टूबर में ही मतदान हो गया था, जबकि देश के बाकी हिस्सों में फरवरी 1952 में वोट डाले गए थे. 

dainikbhaskar

श्याम शरण नेगी जी प्रेरणा हैं उन लोगों के लिए जो ये समझते हैं कि वोट की कोई ताक़त नहीं है. अपना नेता चुनने की आज़ादी दिलाने के हज़ारों लोगों ने अपनी जान कुर्बान कर दी तब जाकर हमें ये अधिकार प्राप्त हुआ है. एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते हम सबको अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए.