Transfer, ट्रांसफ़र, तबादला, स्थानांतरण ये सभी शब्द सरकारी अधिकारियों से सम्बंधित हैं और इनका मतलब भी एक ही है. ये केवल एक छोटा सा शब्द है, लेकिन जिस भी ऑफ़िसर का सामना इस शब्द से होता है, उसके लिए ये मुश्किलों भरा ही होता है. एक आईएएस, आईपीएस, आईआरएस जैसे सरकारी ऑफ़िसर्स का कभी उनके अच्छे कामों की वजह से, तो कभी काम में अच्छा प्रदर्शन न करने के कारण तबादला कर दिया जाता है. तो कई बार ऐसा भी होता है कि अगर उसके कार्यक्षेत्र में कोई घटना जैसे आगजनी, दंगा-फसाद, प्रदर्शन के दौरान कोई उपद्रव हो जाए, तो भी रातों-रात उस ऑफ़िसर का तबादला कर दिया जाता है. कई बार बिना किसी ग़लती के केवल इसलिए एक ईमानदार ऑफ़िसर का तबादला कर दिया जाता है क्योंकि वो ईमानदार है और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को सहन नहीं करता है और गुंडों-बदमाशों और उनको सह देने वाले नेताओं की एक नहीं सुनता है.

क्या इसके लिए कोई पॉलिसी होती है, या नहीं?

लेकिन क्या सच में इतना आसान है किसी ऑफ़िसर का ट्रांसफ़र करना. ये सवाल कई लोगों के मन में आता होगा कि ख़ासतौर पर इन ऑफ़िसर्स के परिवार वालों के मन में. तो इस सवाल का जवाब भी हम आपको दे देते हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आईएएस/आईपीएस अधिकारियों के संबंध में ऐसी कोई लिखित हस्तांतरण नीति नहीं है, जो उन्हें आवंटित किए गए कैडर की राज्य सरकारों द्वारा नियंत्रित की जाती है. इसलिए, किसी भी समय बिना किसी कारण और बिना बताए उनका ट्रांसफ़र किसी भी स्थान पर किया जा सकता है. और यही कारण है कि अधिकारियों को स्थानांतरित करने पर सरकार का विवेकाधिकार है, जिसके बारे में आमतौर पर कर्मचारियों द्वारा पूछताछ नहीं की जा सकती है.

वहीं आईआरएस अधिकारियों के मामले में एक अच्छी तरह से निर्धारित ट्रांसफ़र पॉलिसी है, जो सरकार पर निर्भर नहीं करती है. अगर किसी आईआरएस का ट्रांसफ़र पॉलिसी के ख़िलाफ़ सरकार द्वारा ट्रांसफ़र किया जाता है, तो वो ऑफ़िसर ट्रांसफ़र ऑर्डर को रद्द करने के लिए CAT या फिर High Court के पास जा सकता है. कई अधिकारियों ने पहले कई बार ऐसा किया है जिसके बाद सरकार के आदेश को रद्द कर दिया गया.

चलिए ये तो हो गई बात ट्रांसफ़र और ट्रांसफ़र पॉलिसी के बारे में, अब आपको बताते हैं कि अभी तक किस-किस अधिकारी का उनके पूरे कार्यकाल के दौरान कितनी बार ट्रांसफ़र हुआ है.

1. प्रदीप कासनी

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इस लिस्ट में सबसे पहला नाम आता है हरियाणा सरकार के ईमानदार आईएएस ऑफ़िसर प्रदीप कासनी का, जिनके 34 साल के करियर में 71 बार ट्रांसफर हुआ. इसी साल 28 फरवरी को रिटायर हुए प्रदीप को रिटायरमेंट के बाद न ही 6 महीने की सैलरी मिली और न ही कोई भत्ता या सुख सुविधा। वर्ष 1980 बैच के एचसीएस अधिकारी प्रदीप कासनी 1997 में आईएएस बने थे. उन्होंने हरियाणा सरकार के साथ वर्ष 1984 में अपनी सेवाएं शुरू की थी.

2. विनीत चौधरी

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इस लिस्ट में दूसरा नाम आता है हिमाचल प्रदेश के 1982 आईएएस बैच के ऑफ़िसर विनीत चौधरी. विनीत चौधरी के 31 साल के करियर में 52 बार ट्रांसफ़र किया गया.

3. अशोक खेमका

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इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर नाम आता है अशोक खेमका का. अपनी ईमान्दारी और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ बिना डरे टिप्पणी करने वाले IAS अफ़सर हैं, अशोक खेमका. अशोक खेमका के 26 साल के करियर में उनका 51 बार तबादला हो चुका है. इस ईमानदार अफ़सर का नाम 2012 में उस समय चर्चा में आया था, जब उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की कंपनी और रियल्टी कंपनी डीएलएफ के बीच हुए 57 करोड़ रुपयों के भूमि सौदे में हुई अनियमितताओं के आधार पर रद्द कर दिया था. जिसके बाद उनका का तबादला हरियाणा बीज विकास निगम के महानिदेशक पद पर कर दिया था. इस मामले के बाद उन्हें मौत की धमकी भी मिली थी.

4. Winston Mark Simon Pariat

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असम-मेघालय कैडर के Winston Mark Simon को 36 साल के करियर में 50 बार ट्रांसफ़र किया गया.

5. कुसुमजीत सिंधू

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पंजाब कैडर के कुसुमजीत सिंधू का 46 बार ट्रांसफ़र किया जा चुका है.

6. केशनी आनंद अरोड़ा

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हरियाणा की केशनी आनंद अरोड़ा का भी 45 बार ट्रांसफ़र किया जा चुका है.

सवाल-जवाब की वेबसाइट के quora अनुसार, अगर आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो करीब 13 अफ़सर ऐसे हैं, जिनका 40 या इससे भी ज़्यादा बार ट्रांसफर किया जा चुका है. गौर करने वाली बात ये है कि इन अफ़सरों में से 7 आईएएस अफ़सर तो हरियाणा कैडर के ही हैं.

अपनी ईमानदारी और कर्मठता के कारण बार-बार तबादलों को झेलने वाले ये सरकारी अफ़सर आने वाले सालों में प्रशासनिक अफ़सरों के लिए प्रेरणा श्रोत हैं. कई बार तो इन ऑफ़िसर्स का ट्रांसफ़र ऐसी जगहों पर कर दिया गया जहां पर आमतौर पर ऐसे वरिष्ट अधिकारियों की ज़रूरत ही नहीं होती.