कभी गीता को देश के पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग उठती है तो कभी राम मंदिर एक बार फ़िर विवादों में आ जाता है. आज देश में हिंदुत्तव का झंडा लहराने की भरसक कोशिश की जा रही है, क्योंकि बहुत से लोगों की रोज़ी-रोटी धर्मों के नाम पर ही टिकी हुई है. लेकिन हिन्दू धर्म में कई भ्रांतिया और Myth हैं जिनके बारे में आप शायद नहीं जानते होंगे.

आज हम आपको हिन्दू धर्म में फैले ऐसे ही 9 myths के बारे में बता रहे हैं.

1.हिन्दू धर्म में 33 करोड़ भगवान हैं

सब जानते हैं कि ईश्वर केवल एक है बस उसकी प्रार्थना करने के मार्ग अलग-अलग हैं. जिसे जो मार्ग अच्छा लगता है, वह उसे चुन सकता है. पर बहुत से लोगों का कहना है कि हिन्दू धर्म में तीन मुख्य देवता बर्ह्मा, विष्णु और महेश हैं.

यह काफ़ी विवाद का विषय रहा है. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए शुक्ल कहते हैं कि हिन्दू धर्म एक ऐसा धर्म है जिसमें किसी भी देवता का खंडन किये बगैर एक ही ईश्वर की पूजा की जाती है.

2.हिन्दू इंसानों की पूजा करते हैं

हिन्दू केवल अपने ईश्वर का स्मरण करते हैं. कोई भी हिन्दू यह नहीं कह सकता कि वह किसी इंसान की पूजा करता है, बल्कि वह मूर्ति के रूप में अपनी प्राथना को केन्द्रित करते हैं.

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3.हिन्दू गाय की पूजा करते हैं

हिन्दू सिर्फ़ गायों की ही पूजा नहीं करते, बल्कि उनके लिए हर वो चीज़ पूज्य है, जिसमें जीवन होता है. गाय में जीवन होता है और काफ़ी शांत स्वभाव की होती है, जिसकी वजह से उसका सम्मान किया जाता है.

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4.हिन्दू शाकाहारी होते हैं

बहुत से हिन्दू मांस खाते हैं. केवल 30% हिन्दू ही शाकाहारी हैं जिनका मानना है कि अहिंसा ही प्रकृति का नियम है और इस पर चलना सब का कर्तव्य है.

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5.हिन्दू जात-पात का भेद-भाव करते हैं

जात-पात ने न केवल धर्म बल्कि समाज का भी सत्यानाश किया है. पुरानी किताबों में उल्लेख है कि पहले व्यापार के आधार पर जाति हुआ करती थी, पर धीरे-धीरे ये हमारे समाज का हिस्सा हो गई. हिन्दू धर्म में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा कि जाति के आधार पर कोई भेदभाव किया जाये.

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6.लड़कियों को पुरुषों की तुलना में कम समझा जाता है

बहुत से लोग शक्ति के रूप में पार्वती और दुर्गा की पूजा करते हैं. भारत का यह दुर्भाग्य रहा है कि यहां महिलाओं को मर्दों के बराबर नहीं समझा जाता. यह विचार किसी धर्म की देन नहीं बल्कि समाज की संकरी मानसिकता की उपज है, जिसे लोगों ने अपने फ़ायदे के लिए धर्म से जोड़ दिया है.

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7.लाल सिंदूर लड़की के शादी होने का प्रतीक है

लड़कियों के माथे के ऊपर तिलक को आज शादी का प्रतीक माना जाता है और बिंदी को फैशन का सिम्बल समझा जाता है, जिसे शादीशुदा महिलाओं के अलावा लड़कियां भी इस्तेमाल करती है.

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8.भगवद् गीता, बाइबिल की तरह ही है

हिन्दू धर्म में कोई एक मान्य किताब नहीं है बल्कि यहां धार्मिक किताबों का बहुत बड़ा ख़ज़ाना भरा हुआ है, जिनमें गीता से लेकर रामायण और वेद, उपनिषद् आदि शामिल हैं.

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9.कर्म ही भाग्य है

हर व्यक्ति अपना भाग्य खुद बनाता है जिसके पीछे उसके कर्मों का हाथ होता है. हिन्दू धर्म के अनुयायियों का मानना है कि इंसान के कर्मों से ही उसका भाग्य तय होता है.

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