कभी सोचा है? 

ट्रैफ़िक जाम से भरे शहरों में, आपकी ज़िन्दगी को रफ़्तार देने के लिए कैसे ज़मीन के कई फ़ीट नीचे, अपना रास्ता बना लेती है मेट्रो? 

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इस काम के लिए Tunnel Boring Machine का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें सबसे आगे एक Rotating Cutting Wheel होता है.  

मशीन में पीछे लगे हाइड्रॉलिक सिलेंडर इस पहिये को आगे की तरफ़ धक्का देते हैं. पहिये में लगे डिस्क कटर्स और अन्य उपकरण मिट्टी पर प्रहार करते हैं.

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खुदाई में निकलने वाली मिटटी और पत्थर को एक Conveyor Belt के ज़रिये बाहर भेज दिया जाता है. 

थोड़ी दूर तक टनल बनाने के बाद, अब Ring का काम शुरू होता है. कंक्रीट से तैयार Ring के ये मज़बूत टुकड़े सीधे फ़ैक्टरी से बन कर आते हैं. एक मशीन इन कंक्रीट पत्थरों को आपस में जोड़ कर बारीकी से फ़िट कर देती है जिससे पूरा Ring बन जाता है.

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जब इतने क्षेत्र में सारे Ring बन जाते हैं, मशीन आगे की खुदाई का काम शुरू कर देती है. इसी तरह खुदाई के साथ-साथ Rings तैयार करते हुए टनल आगे बढ़ती है.

रात दिन हज़ारों कर्मचारियों की मेहनत के बाद,आख़िरकार टनल अपना रास्ता बनाते हुए मंज़िल तक पहुंच ही जाती है.

तो अगली बार जब मेट्रो का ख़ूबसूरत सफ़र करियेगा इन लोगों को दिल से शुक्रिया ज़रूर बोलियेगा.