मायानगरी मुंबई सपनों का शहर है. भागती-दौड़ती मुंबई वहां जाने वाले हर शख़्स का सपना पूरा करती है. बस उसके लिये धैर्य और हिम्मत रखने की ज़रूरत होती है. जैसे इस ऑटोवाले ने रखा और आज सुकून भरी ज़िंदगी बिता रहा है. 

Humans of Bombay में छपी कहानी के मुताबिक, ये ऑटो चालक मुंबई अपने भाई के कहने पर आया था. ताकि वो मुंबई में काम कर घर के लिये कुछ पैसे जुटा सके. इस ऑटो ड्राइवर का कहना है कि मुंबई आने से पहले उसने कभी बड़े-बड़े होर्डिंग्स, फ़ैंसी लोग और ख़ूब सारे पैसे नहीं देखे थे. इस शख़्स का कहना है कि ये शहर आपके लिये कुछ करता है. 

हालांकि, इस बंदे ने मायानगरी में काफ़ी बुरा वक़्त भी गुज़ारा है क्योंकि एक समय ऐसा भी था, जब वो भूख से तड़प रहा था और लोगों ने उसकी मदद से भी इंकार कर दिया था. इस दौरान एक पल ऐसा भी आया जब ऑटो ड्राइवर का इंसानियत पर दोबारा विश्वास जागा. Humans of Bombay से इस किस्से का ज़िक्र करते हुए उसने बताया कि एक बार वो फ़्लाईओवर के नीचे फंस गया था. पानी का स्तर इतना ज़्यादा था कि उस दौरान उसे ऐसा लगा जैसे मानों उसकी ज़िंदगी का अंत होने वाला है. 

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वो अपनी मौत को करीब से देख ही रहा था कि कुछ लोग मसीहा बन कर उसके सामने आये. इन लोगों ने पानी में डुबकी लगा कर ऑटो ड्राइवर और उसके रिक्शा को बाहर निकाला. ऑटोचालक का कहना है कि उन्हें ऐसा करने की कोई आवश्यकता नहीं थी, फिर भी उन लोगों ने मेरी मदद की. इसलिये मैं हर रोज़ उन लोगों को दुआओं में याद करता हूं. 

इसके साथ ही उसका ये भी कहना है कि उस किस्से से मुझे ये समझ आ गया है कि अगर इस शहर में कुछ लोग बुरे हैं, तो कुछ अच्छे भी हैं. इसलिये अब वो किसी की बातों को दिल से नहीं लेता. साथ ही मुंबई में रहकर वो इतना कमा लेता है कि अगर उसका भाई गांव में खेती बाड़ी न भी करे, तो भी घर आराम से चलता रहेगा. 

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अपनी बातों को ख़त्म करते हुए ऑटो ड्राइवर ने कहा कि इस शहर में आने वाले लोग लाखों की भीड़ में कहीं खो जाते हैं. पर अगर आप अपनी कोशिश जारी रखते हैं, तो ये शहर आपके सपनों को साकार ज़रूर करता है. 

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