वो 25 साल के भी नहीं हुए थे और उन्होंने अपनी लाइफ़ में दौलत, शोहरत और नाम सब कुछ कमा लिया था. ये वो उम्र होती है जब बहुत से लोग इतना सबकुछ पाने का सिर्फ़ सपना ही देख रहे होते हैं. बात हो रही Oyo Hotels के फ़ाउंडर रितेश अग्रवाल की, जो आज दूसरे सबसे युवा अरबपती हैं दुनिया के.

मगर इतनी छोटी सी उम्र में उन्होंने ये सब कैसे हासिल किया. इस दौरान उन्हें किन-किन परेशानियों का सामना किया. ऐसे सभी सवालों का जवाब उन्होंने ख़ुद ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे नाम के एक फ़ेसबुक पेज पर शेयर की है. चलिए सुनते हैं उनकी संघर्ष भरी दास्तां उन्हीं कि ज़ुबानी.

Ritesh Agarwal founder and CEO of OYO rooms
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'Entrepreneur ये शब्द मैंने बचपन में पहली बार अपनी बहन के मुंह से सुना था. तब मैंने इसके मतलब के बारे में जाना और तभी मैंने तय कर लिया था कि मैं बड़े होकर एक Entrepreneur बनूंगा. इसके बाद जब भी मुझसे कोई पूछता कि तुम क्या बनना चाहते तो मैं तपाक से कहता Entrepreneur.'

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'मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक़ रखता था और हमारा परिवार तब ओडिशा के छोटे से शहर रायगढ़ में रहता था. पर मेरे सपने बहुत बड़े थे और मेरे अंदर Entrepreneur बनने का कीड़ा था. इसके लिए मैंने कभी सिम कार्ड बेचा तो कभी किताब लिखना शुरू कर देता. यहां तक मैंने कई तरह की अतरंगी नौकरियां भी कीं.'

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रायगढ़ में सीमित अवसर ही थे इसलिए 10वीं पास होने के बाद मेरे पिता ने मुझे कोटा भेज दिया इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने. यहां मैंने देखा कि दुनिया में क्या-क्या हो रहा है. यहां हर वीकेंड पर मैं कोट से दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां होने वाली स्टार्ट-अप फ़ाउंडर्स की कॉन्फ़्रेंस अटेंड करता. वो भी चुपके से. जब वो बताते कि कैसे उन्होंने अपनी सोच को एक भरे-पूरे कारोबार में तब्दील कर दिया, इस बात से मुझे प्रेरणा मिलती थी. 18 साल की उम्र तक मैंने कई होटलों के मालिक और यहां आने वाले कस्टमर्स से बात की. इसके लिए मुझे रेंट पर कमरे लेने पड़ते थे. कई बार इसके लिए मेरे पास पैसे भी नहीं होते थे. पर किसी न किसी तरह मैं इसे मैनेज कर लेता था.
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'पर एक दिन मेरे पिता को पता चल गया कि मैं अपनी क्लासेस अटेंड नहीं कर रहा हूं. तब उन्हें समझाना बहुत मुश्किल हो गया था. पर मैं जानता था कि अगर मैं अपना आइडिया उन्हें नहीं बेच सकता तो किसी के साथ ऐसा नहीं कर पाऊंगा. बात काफ़ी बढ़ गई थी मगर मेरी मां ने किसी तरह सिचुएशन को संभाल लिया. इसके बाद मुझे Peter Thiel Fellowship मिल गई. मैं ये स्कॉलरशिप पाने वाला एशिया का पहला नौजवान था.'

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'इसकी मदद से मैं पहली बार विदेश गया. यहां मैंने कई होटल्स में बतौर स्टाफ़ काम किया. बेबी सिटिंग की. कस्टमर्स के साथ उनो खेला, इसके लिए कभी -कभी मुझे टिप भी मिल जाती थी. मैं 24 घंटे काम करता रहता था इससे मेरे घर वाले बहुत ही परेशान रहते थे. मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं था, जब तक मैंने एक दिन Oyo Rooms से दुनिया भर के शहरों तक नहीं पहुंचा दिया. '

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'मैंने यहां पर बहुत से परिवारों और दोस्तों को अपनी छुट्टियां इंजॉय करते हुए देखा. इसने संतुष्टि और ख़ुशी से भर दिया. आज हम दुनियाभर में लाखों लोगों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं. इससे मुझे बहुत ही ख़ुशी मिलती है. मगर सबसे ख़ुशी की बात ये है कि मैंने अपना वो सपना पूरा कर लिया जो मैंने 10 साल की उम्र में देखा था.'

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