ये बात तो हम सब जानते होंगे कि भारतीय सेना का कठोर अनुशासन एक जवान को सिर्फ़ मज़बूत और फ़ौलादी ही नहीं बनता, बल्कि इस असंवेदनशील समाज के सामने अडिग खड़े रहने के रास्ते भी निकालता है. ऐसा ही फ़ौलादी जिगरा रखने वाले हैं शख़्स हैं मेजर गोपाल मित्रा. मेजर गोपाल मित्रा भारतीय सेना का एक ऐसा नाम है जो देश सेवा और समाज सेवा दोनों में अहम योगदान के लिए जाना जाता है.

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क्या हुआ था मेजर मित्र के साथ?

आतंकवाद से टक्कर लेने की क़ीमत गोपाल मित्रा को अपनी आंखों को गंवा कर चुकानी पड़ी. वेस्ट बंगाल के रहने वाले गोपाल मित्रा ने 1995 में इंडियन आर्मी में कमीशन प्राप्त किया. इसके बाद वो लंबे समय तक नॉर्थ ईस्ट और कश्मीर में आतंकवाद के ख़िलाफ़ डंटकर खड़े रहे. तभी उधर 1999 में कारगिल वॉर शुरू हो गई. वॉर के दौरान वर्ष 2000 में ‘सर्च एंड डिस्ट्रॉय’ ऑपरेशन कश्मीर के डिस्ट्रिक्ट कुपवाड़ा में मेजर मित्रा भी शामिल थे. लेकिन सर्च ऑपरेशन के दौरान एक माइन ब्लास्ट की वजह से मेजर गोपाल की आंखों की रौशनी हमेशा के लिए चली गई. इसके बाद आर्मी ने उन्हें दो साल तक ट्रीटमेंट दिया लेकिन आंखों की रौशनी वापस नही लौट सकी. मगर मेजर मित्रा हौसला डगमगाया नहीं. उन्होंने अपने आगे के सफ़र में हिम्मत का जो परिचय दिया वो सदियों तक याद किया जाएगा.

मेजर मित्रा के नाम के साथ एक बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है, वो इंडिया की तरफ से पहले दिव्यांग व्यक्ति हैं, जिसे यूनिसेफ़ हेडक्वार्टर में नियुक्त किया जाएगा. इस बात की पुष्टि करते हुए बीते मंगलवार, इंडियन आर्मी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से मेजर गोपाल मित्रा की प्रेरणादायक कहानी पोस्ट की है. इंडियन आर्मी ने अपनी पोस्ट में लिखा:

'मेजर गोपाल मित्रा ने अपनी आंखों की रौशनी साल 2000 में IED ब्लास्ट में खो दी थी. आंखों की रौशनी खोने के बाद तमाम बाधाओं और दिक्कतों का सामना करते हुए मेजर मित्रा ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज से सोशल वर्क में मास्टर्स किया और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से डेवलपमेंट मैनेजमेंट में एमएससी किया है. अब वो यूनिसेफ़ हेडक्वार्टर में नियुक्त होने वाले भारत के पहले दिव्यांग व्यक्ति हैं.'

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय सेना का ऑफ़िशियल इंस्टाग्राम अकाउंट, इसकी ADGPI शाखा द्वारा संचालित किया जाता है.

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तमाम बाधाओं को तोड़ते हुए मेजर मित्रा ने JAWS- Job Access with Speech का भी ज्ञान अर्जित किया. बता दें कि JAWS, माइक्रोसॉफ़्ट विंडोज़ के लिए एक कंप्यूटर स्क्रीन रीडर प्रोग्राम है, जो नेत्रहीन और दृष्टिबाधित उपयोगकर्ताओं को स्क्रीन पर या तो टेक्स्ट-टू-स्पीच आउटपुट के साथ या एक रीफ़्रेशबल ब्रेल डिस्प्ले द्वारा स्क्रीन पढ़ने में मदद करता है. डेवलपमेंट में करियर बनाने का निर्णय करने वाले मेजर मित्रा की शादी श्रीरूपा, जो रिटायर्ड कैप्टन जयंत कुमार सेनगुप्ता की बेटी हैं, से हुई है.

देश के हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा हैं मेजर गोपाल मित्रा.