मैं ऑफ़िस आई और सबने मुझसे हमेशा की तरह पूछा, और कैसी हो? हमेशा की तरह मैंने कहा हां, 'ठीक हूं'.

मगर मैं उस पल में बोलना चाहती थी कि नहीं मैं बिलकुल ठीक नहीं हूं. मुझे आजकल बिलकुल अच्छा नहीं लगता है. मेरा बिस्तर से उठने का मन नहीं करता है.

मुझे यकीन है सबके साथ ऐसा कई बार होता है. हमारे किसी क़रीबी को खोने का दुःख, ख़राब स्वास्थ्य या किसी अन्य अनहोनी जैसी मुश्किलें आती ही रहती हैं. हम अक्सर किसी कठिन परिस्थिति का सामना करते ही हैं. और ये सारी चीज़ें ऐसी होती हैं जिसमें हमारा कोई बस नहीं चलता है. हम हमेशा सोचते हैं कि ठीक है ये जीवन का हिस्सा है. ये ऐसे पल होते हैं जब हम बस उदास होते हैं. कई बार थोड़ा हारा हुआ सा महसूस करते हैं.

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लेकिन हमें हमेशा से बोला जाता है कि ख़ुश रहो. अपनी उदासीनता किसी को मत दिखाओ. ख़ुशियां बांटो. इसलिए हम अक्सर अपने उदास दिनों या मन के बारे में बहुत सहजता से बात नहीं करते. पर क्यों? अगर ख़ुशी एक भाव है तो उदास होना भी. ख़ुशी खुल कर व्यक्त कर सकते हैं तो उदास होना भी. ज़रूरी है कि हम ये मानें कि ठीक है अभी मेरा समय सही नहीं चल रहा है. ठीक है अगर उस दिन आपका बिस्तर से उठने का मन नहीं कर रहा है. ठीक है अगर आप रोना चाहते हो. ठीक है अगर आप चुप-चाप अपने में रहना चाहते हो. ITS ALL OKAY!

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अपने आप को किसी भी भाव को महसूस करने से न रोकें. अपनी उदासी को दूर करने की कोई जल्दबाज़ी न करें. कई बार हमें लगता है कि दुख का सामना करना या उसे जीना बहुत मुश्किल है इसलिए हम उससे जितनी जल्दी हो सके 'निपटना' चाहते हैं. लेकिन एक बात हमेशा ध्यान रखिए कि किसी चीज़ से बाहर निकलने का एक ही रास्ता होता है वो है उससे गुज़र कर. और इसी प्रक्रिया में आप किसी परिस्थिति से उबरते हैं, हील करते हैं. ज़रा ध्यान से सोचेंगे तो आप ख़ुद पाएंगे कि जीवन में जिन जटिल परिस्थितियों को आपने नज़रअंदाज़ किया, जल्दबाज़ी में उनसे निपटने, भागने की कोशिश की, वो जीवन भर बनी रहीं और किसी अनसुलझी पलेगी या एक गहरे दुख की तरह आपके साथ चलती रहीं.

गुज़र जाने की बात इसलिए भी बेहद ज़रूरी है कि अगर आप ठीक न महसूस करने को सामान्य मान लेंगे तो ऐसा न हो कि आप उससे निकलने की कोशिश ही न करें या निकल ही न पाएं. और हो सकता है कि किसी मुश्किल परिस्थिति से बाहर निकलने के लिए आपको मदद की ज़रूरत हो.