इंसान के अंदर किसी काम को करने का जज़्बा हो तो हर मुश्किल चुनौती से लड़ सकता है. मुश्किल व विपरीत परिस्थिति से भिड़ सकता है.

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करने वाली लक्ष्मी आज तमाम महिलाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं.

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दरअसल, इसी साल जुलाई माह में पति की मौत के बाद बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए लक्ष्मी ने भोपाल रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करना शुरू किया. लक्ष्मी के पति इसी स्टेशन पर कुली के रूप में काम कर रहे थे. आज भोपाल रेलवे स्टेशन पर बिल्ला नंबर 13 लक्ष्मी की पहचान है.

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आप अगर भोपाल रेलवे स्टेशन पर जाएं तो लक्ष्मी का मुस्कराता चेहरा देखने को मिल जायेगा. लेकिन तमाम मुश्किलों और विपरीत परिस्थिति के बावजूद लक्ष्मी ने हार नहीं मानी और आज अपने परिवार को सहारा दे रही हैं.

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आठ साल के बच्चे की मां लक्ष्मी कहती हैं-

पति की मौत के बाद मुझे मेरे बेटे को सहारा देना था. ज़्यादा पढ़ी नहीं हूं लेकिन बेटे का भविष्य बेहतर करना था. उसे एक अच्छी ज़िंदगी देनी थी तो मजबूरन कुली का काम करना पड़ रहा है. इस नौकरी से मैं हर दिन सिर्फ़ 50 से 100 रुपये ही कमा पाती हूं.
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लक्ष्मी कहती हैं कि कुली के रूप में काम करना मेरे लिए लिए आसान नहीं था. ये बेहद मुश्किल काम है. कभी कभी तो 50 किलो का बोझ भी उठाना पड़ता है. लेकिन आय का दूसरा कोई विकल्प नहीं है मेरे पास. बेटे के बेहतर भविष्य के लिए कुछ ना कुछ तो करना ही है'.

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स्थाई नौकरी की है ज़रूरत

इस नौकरी में कुछ भी निश्चित नहीं है. किसी दिन ऐसा भी होता है कि एक भी रुपये की कमाई नहीं होती. ऐसे में मैं बेटे को आगे बढ़ाने और जीवनयापन के लिए एक स्थाई नौकरी की ज़रूरत है.

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ग्रुप डी में नौकरी देने की मांग

सहयोगी कुली महेश प्रजापति कहते हैं कि, हमने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर लक्ष्मी को रेलवे में ग्रुप डी की नौकरी देने की मांग की है. कई बार यात्री उन्हें महिला समझकर सामान नहीं उठाने देते. ऐसे में हम लोग यात्रियों को उनके हालात के बारे में समझाते हैं और ज़रूरत पड़ने पर ख़ुद सामान उठाने में भी मदद कर देते हैं.

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महिला कुली के तौर पर काम करने को लेकर लक्ष्मी के एक सहयोगी कहते हैं, 'समाज को जो सोचना है सोचे. लेकिन सच्चाई तो ये है की लक्ष्मी आत्मनिर्भर बनकर अपने बेटे के लिए काम करना चाहती हैं. वो उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं'.