हर तस्वीर की एक कहानी होती है और हर कहानी की हमारे दिमाग में एक तस्वीर. ये कहानी उस व्यक्ति की है, जो अपनी तस्वीरों को बयां नहीं करता, बल्कि इसकी तस्वीरें इतनी काबिल हैं कि वो खुद को बयां कर देती हैं. ये वो व्यक्ति है जो आज से कुछ सालों पहले सड़क से कूड़ा उठाता था, ये वो है जो ढाबे पर बर्तन धोता था. 

मिलिए मशहूर फोटोग्राफर विक्की रॉय से. 

जेब में महज़ 800 रुपये और पोटली में बंद परेशानियों के साथ 13 साल की उम्र में विक्की कोलकाता के एक छोटे से गांव से भाग कर दिल्ली आ गए. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर सिर छुपाने की जगह मिली. उस छोटी उम्र में कंधों पर ज़िम्मेदारी नहीं थी, पर कूड़ा रखने वाला झोला ज़रूर आ गया था. फिर एक NGO में उन्हें आसरा मिला, जिसकी मदद से उन्हें अपनी एक पहचान मिली और किस्मत फिर से लिखने का जज़्बा.

साल 2004 में एक ब्रिटिश फ़ोटोग्राफ़र के साथ काम करते हुए विक्की ने उस कैमरे के लेंस से एक सपना देख लिया. ट्राइपॉड और कैमरे का सामान उठाते हुए विक्की ने कैमरे की बारीकी सीखी और फिर ऐसे आगे बढ़ा कि पीछे मुड़ कर नहीं देखा. 

विक्की रॉय की ये तस्वीरें आपका दिल जीत लेंगी: 

ज़िन्दगी का सुहाना सफ़र 

पढ़ाई की भूख कभी पूरी नहीं होती

हंसता-मुस्कुराता ज़िन्दगी का सफ़र

हर पन्ने पर एक नयी कहानी  

दूसरों की ज़िन्दगी में चमक लाते हुए 

विक्की की कहानी अपने आप में एक बेहतरीन मिसाल है कि ज़िन्दगी में अंधेरा कितना भी हो, अगर आप चाहें तो रौशनी मिल ही जायेगी. कुछ ऐसा ही है Tecno का नया स्मार्टफ़ोन CAMON i4 जिसके 'Triple Rear Camera' से आपको हमेशा एक परफ़ेक्ट शॉट मिले, चाहे लाइट कैसी भी हो. विक्की की कहानी आप तक पहुंचाने का श्रेय Tecno को जाता है. बेशक इस कहानी से बहुत लोगों को अपने सपनों को सच में बदलने की प्रेरणा मिलेगी, भले परिस्थिति कितनी ही कठिन हो.

मोटिवेशन का एक डोज़ और चाहिए तो इस लिंक पर क्लिक करो.