दुनिया में कुछ लोग होते हैं, जो किसी और की मदद के लिए सामान्य हदों को पार कर जाते हैं. ओडिशा से एक ऐसा ही मामला सामने आया है.

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बेहरमपुर के MKCG Medical College And Hospital में सबीता भर्ती थीं. ऑपरेशन की मदद से उसने एक बेटी को जन्म दिया था. ऑपरेशन के दौरान काफ़ी ख़ून निकल गया था, उसकी हालात नाज़ुक थी.

डॉक्टरों ने रक्तदान करने के लिए लोगों को ढूंढना शुरू कर दिया था लेकिन कोई मिल नहीं रहा था. बबीता का ब्लड ग्रुप 'Bombay A+ve' ये भारत में सिर्फ़ 2,50,000 लोगों के शरीर में पाया जाता है.

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WhatsApp ग्रुप पर भी मैसेज भेज कर दूर-दूर तक इस बात को पहुंचाई गई. 500 किलोमिटर दूर एक शख़्स मिला जिसकी रगों में 'Bombay A+ve' ख़ून दौड़ रहा था. मसला ये था कि उतनी दूर से ख़ून आए कैसे!

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राउरकेला से Dillip Barik रक्तदान करने के लिए ख़ुद ही चल पड़े. Bhubaneswar में स्थीत Blood Donation Group ने उनकी मदद की, जिससे सबिता की जान बचाई जा सकी. Dillip सिर्फ़ रक्तदान करने के लिए 500 किलोमिटर की यात्रा की थी.

जब से Dillip Barik को अपने अनोखे ब्लड ग्रुप के बारे में पता चला है, वो चार बार रक्तदान कर चुके हैं.