इस कहानी में एक लड़की है, उसकी ख़ूबसूरत पत्नी है, बेटी है और बेटा भी. इसके साथ ही जीने के लिये वो सारी सुख-सुविधाएं भी, जिनकी एक आम आदमी को ज़रूरत होती है. यहां तक सब ठीक है बस इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है, लेकिन उसका ख़ुलासा अभी नहीं कर सकते हैं. क्योंकि अगर ऐसा किया, तो आपको कहानी पढ़ने में बिल्कुल भी मज़ा नहीं आयेगा.

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दरअसल, Reddit पर एक व्यक्ति ने अपने 10 सालों की ज़िंदगी को कुछ शब्दों में बयां करने की कोशिश की है. इस शख़्स के मुताबिक, वो कॉलेज में था और आख़िरी सेमेस्टर चल रहा था. इस दौरान एक फ़ुटबॉल खिलाड़ी ने उस पर हमला किया, क्योंकि वो वहां चल रहा था जहां वो प्लेयर ड्राइव करने की कोशिश कर रहा था.

आगे की कहानी का ज़िक्र करते हुए उस शख़्स ने बताया कि इस दौरान वो एक बेहद ख़ूबसूरत लड़की से मिला, जिसे देखते ही उसका दिल उसका नहीं रहा. ख़ैर, उसने अपने दिल की बात कहने में देरी नहीं लगाई और जाकर उसे सब बता दिया. वहीं उस लड़की ने भी उसे इंकार नहीं किया और इश्क-ए-इज़हार के बाद दोनों ने शादी कर घर बसा लिया. शादी के थोड़े समय बाद ही दोनों को एक बेटी भी हुई.

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अब शख़्स के पास अच्छी नौकरी, बीवी और बेटी थी, जिसके अलावा उसे ज़िंदगी से और कुछ नहीं चाहिए था. वहीं बेटी को हुए दो साल ही हुए थे कि उसे एक बेटा भी हो गया. इस शख़्स का बेटा उसकी ज़िंदगी में एक नया आनंद लेकर आया था और वो हर रोज़ ऑफ़िस जाने से पहले बेटे और बेटी के कमरे में जाकर उनके काला टीका लगा कर आता. सब कुछ लाइफ़ में एकदम परफ़ेक्ट चल रहा था कि कहानी में एक ट्विस्ट आता है.

दरअसल, एक दिन वो काउच पर बैठा होता है कि उसकी नज़र कमरे में रखे लैंप पर पड़ती है, जिसमें उसे कुछ अजीब सा नज़र आता है. वो पूरी रात उस लैंप को घूरता रहा. अगले दिन वो ऑफ़िस भी नहीं गया और अब तक उसे लैंप में गड़बड़ नज़र आ रही थी. इसके बाद लैंप को घूरने का सिलसिला 3 दिन तक यूं ही चलता रहा. लैंप की वजह से वो इतना परेशान हुआ कि उसने खाना-पीना सब छोड़ दिया और वो सोफ़े से तभी उठता, जब उसे बॉथरुम जाना होता.

आगे वो कहता है कि 'मेरी पत्नी मेरी हालत देख कर परेशान हो रही थी. इसके बाद वो किसी को लेकर आई, ताकि मैं कुछ बात कर सकूं. पर उसकी सारी कोशिशें नाकाम हो रही थी. मेरी कंडीशन में कोई सुधार नहीं था, जिस वजह से परेशान होकर मेरी पत्नी बच्चों को लेकर उसकी मां के घर चली गई. इस इंसान की ज़िंदगी में जो भी रहा था वो सच नहीं, बल्कि सब सपना था.'

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शख़्स की आंखें खुली तब उसने ख़ुद को फ़ुटपाथ पर पाया, चारों ओर से उसे तरह-तरह के लोगों की आवाज़ सुनाई दे रही थी. इसके बाद पुलिसवाले उसे अस्पताल ले जाते हैं. ये सब देख कर ये शख़्स कंफ्यूज़ था कि सपना क्या है, जो उसने देखा या फिर जो कुछ हकीक़त में हो रहा था.

24 घंटे के अंदर ही इस शख़्स की कहानी पर लोगों की बहुत सारी प्रतिक्रियाएं आयीं, जिसकी उसने कल्पना नहीं की थी.