सोशल मीडिया की वजह से 2 दिन पहले दिल्ली के मालवीय नगर में 'बाबा का ढाबा' चलाने वाले एक बुज़ुर्ग दंपत्ति को ज़िंदगी भर की ख़ुशियां मिल गईं. इस दौरान मददगार बेझिझक होकर आगे आये और हर तरीक़े से इस बुज़ुर्ग दंपत्ति की मदद की.

दरअसल, कॉरोनाकाल में बुज़ुर्ग दंपत्ति का ढाबा चल नहीं पा रहा था. इसलिए किसी यूट्यूबर ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. इसके बाद बॉलीवुड से लेकर स्पोर्ट्स तक की हस्तियों ने आगे आकर इस बुज़ुर्ग दंपत्ति की मदद करके दिखाया कि सोशल मीडिया का सदुपयोग किया जाये तो क्या से क्या हो सकता है.

इस दौरान कई मशहूर फ़ूड ब्लॉगर भी 'बाबा का ढाबा' पर खाना खाते नज़र आये थे. आज लोगों के आने से दुकानदारी भी अच्छी हो रही भी और लोगों की मदद मिलना भी बरक़रार है.

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आइये जानते हैं आख़िर कौन हैं 'बाबा का ढाबा' चलाने वाला ये बुज़ुर्ग दंपत्ति?

5 साल की उम्र में हो गई थी शादी 

80 साल के कांता प्रसाद अपनी पत्नी बादामी देवी के साथ मिलकर साल 1988 से दिल्ली के मालवीय नगर में 'बाबा का ढाबा' चला रहे हैं. मूल रूप से यूपी के रहने वाले कांता प्रसाद 21 साल की उम्र में ही रोज़गार की तलाश में दिल्ली आ गए थे. कांता प्रसाद जब केवल 5 साल के थे और बादामी देवी सिर्फ़ 3 साल की तभी उनकी शादी हो गई थी.

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1 कमरे के मकान में रहते हैं 

बता दें कि कांता प्रसाद दिल्ली के शेख़ सराय इलाक़े में अपने परिवार के साथ 1 कमरे के मकान में रहकर किसी तरह से अपना गुज़ारा कर रहे हैं. उनके 2 बेटे व 1 बेटी हैं. बेटे अलग रहते हैं जो छोटा मोटा काम करके अपना परिवार को संभाल रहे हैं, जबकि बेटी, कांता प्रसाद के साथ ही रहती हैं, जिसकी एक बेटी भी है.

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32 सालों से सस्ते में खिला रहे हैं लज़ीज़ खाना

कांता प्रसाद जब दिल्ली आये तो उन्होंने फ्रूट्स बेचने का काम शुरू किया. इसके कुछ साल बाद वो ढेले पर दाल-चावल और चाय-पराठा बनाने का काम करने लगे. समय के साथ वो पूरी तरह से इसी काम में लग गए. पिछले 32 सालों से कांता प्रसाद इसी तरह ठेले पर लोगों को सस्ते में लज़ीज़ खाना परोस रहे हैं.

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'Zomato' में 'बाबा का ढाबा' हुआ रजिस्टर्ड

बुधवार को वीडियो वायरल से ही लगातार बाबा का ढाबा पर लोगों की भीड़ नज़र आ रही है. इस बीच फ़ूड ऐप 'Zomato' ने 'बाबा दा ढाबा' को रजिस्टर्ड कर लिया है. अब कई लोग ऑनलाइन ब्रेकफ़ास्ट, लंच और डिनर के साथ-साथ चाय-पराठे का ऑर्डर भी दे रहे हैं.

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों से मिली मदद पर कांता प्रसाद का कहना है कि, 30, 40 या 50 की उम्र में ना सही लेकिन भगवान आपकी सुनता ज़रूर है. मैंने पूरी ज़िंदगी ईमानदारी के साथ काम किया. आख़िरकार ऊपरवाले ने 80 साल की उम्र में मेरी फ़रियाद सुन ही ली.