महाराष्ट्र के बीड ज़िले से एक बेहद गंभीर ख़बर सामने आई है.

पिछले तीन साल में बीड ज़िले में 4,605 महिलाओं के गर्भाशय निकाले जाने का गंभीर मामला सामने आया है. मंगलवार को महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री एकनाथ शिंदे ने ख़ुद विधानसभा में इसकी जानकारी दी.

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इसके बाद शिवसेना विधायक नीलम गोर्हे ने विधान परिषद में इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि बीड ज़िले में गन्ने के खेतों में काम करने वाली महिलाओं के गर्भाशय निकाल लिए गए, ताकि माहवारी के चलते उनके काम में परेशानी न हो.

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आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक़, महाराष्ट्र के बीड ज़िले के वंजारवाड़ी गांव में महिलाओं से खेतों में ज़्यादा से ज़्यादा काम लेने के लिए दो या तीन बच्चे को जन्म देने के बाद उनकी कोख को निकाल दिया जाता है. ताकि महिलाओं को पीरियड न हो और वे खेतों में ज़्यादा काम कर सकें. बीड के डॉक्टर पैसों के लालच में इन महिलाओं की कोख निकालने का काला धंधा कर रहे हैं.

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इस संबंध में बीड ज़िला अस्पताल के डॉ. अशोक थोरात ने बताया कि बीड ज़िले के 10 निजी अस्पतालों में सबसे ज़्यादा महिलाओं का गर्भाशय निकाला गया है. मजदूरी करने की वजह से महिलाएं अपनी साफ़-सफ़ाई का ध्यान नहीं रख पाती हैं, जिसके चलते उन्हें गर्भाशय की बीमारियों का सामना करना पड़ता है.

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बीड की सामाजिक कार्यकर्ता मनीषा तोकले ने बताया कि' पीरियड्स के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करने से कई महिलाओं को गर्भाशय का इंफ़ेक्शन हो जाता है, जो कुछ समय के बाद कैंसर का रूप भी ले लेता है. जब महिलाएं कैंसर का इलाज कराने हॉस्पिटल जाती हैं, तो यहां कुछ डॉक्टर रुपयों के लालच में कैंसर से मौत का डर दिखाकर उनका गर्भाशय ही निकाल देते हैं. महिलाएं भी मौत के डर से अपना गर्भाशय निकलवाने के लिए मजबूर हो जाती हैं.

सरकार ने दिए जांच के आदेश

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स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री एकनाथ शिंदे ने स्वास्थ्य मंत्रालय के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति के गठन के आदेश दिए हैं. ये समिति गर्भाशय निकाले जाने के सभी मामलों की जांच करेगी. इस दौरान सभी पी‍ड़‍िताओं से भी बात की जाएगी.

समिति दो महीने में पेश करेगी रिपोर्ट

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मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव अगुआई वाली इस समिति में 3 गाइनोकोलॉजिस्ट के साथ-साथ कुछ महिला विधायकों को भी शामिल किया गया है. समिति दो महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.

राष्ट्रीय महिला आयोग ने अप्रैल में इस मामले के सामने आने के बाद राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया था.