मुंबई और इसके आस-पास सैंकड़ों प्राकृतिक झरने मौजूद हैं. इनसे बहते पानी और उसके आस-पास की हरियाली लोगों को शांति के पल बिताने का लिए मौक़ा देती हैं. लोग अकसर यहां अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाने जाते हैं, लेकिन अधितकर लोग लौटते समय वहां पर कूड़ा-कचरा छोड़ के आते हैं. ये कचरा उस जगह के प्राकृतिक सौंदर्य को नष्ट करने का काम कर रहा है.

waste from Waterfalls
Source: timesofindia

इन झरनों पर आए दिन बढ़ रही गंदगी को लेकर धर्मेश बरई परेशान थे. इसे साफ़ करने के लिए उन्होंने ख़ुद ही एक टीम बनाई और यहां मौजूद झरनों से करीब 10,000 किलो कचरा साफ़ कर उन्हें फिर से स्वच्छ और सुंदर बनाने का काम किया है.

धर्मेश की टीम में 8-65 साल के करीब 30 मुंबईकर हैं. इनकी टीम का नाम है Environment Life. ये टीम अब तक मुंबई के आस-पास मौजूद 16 झरनों को साफ़ कर चुके हैं.

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ये टीम साल 2016 से ही झरनों की साफ़-सफ़ाई करने में लगी हुई है. My Waste, My Responsibility इनका नारा है. धर्मेश बरई ने इस बारे में टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए कहा- ‘यहां मौजूद कचरे में 80 फ़ीसदी खाली पानी की बोतल और खाने के पैकेट्स होते हैं. हम मुंबई के लोगों से अपील करते हैं कि वो यहां कचरा न फैलाएं. जैसे वो भरी हुई बोतल लेकर आते हैं, उसी तरह खाली बोतल भी वापस लेकर जाएं और उसे झरने के पास छोड़ने की बजाए किसी डस्टबिन में डाल दें.’

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टीम के एक और सदस्य ने बताया कि उन्हें हर झरने को साफ़ करने में करीब 3-4 घंटे लगते हैं. लोग यहां जाकर कुछ सुकून के पल बिताते हैं, लेकिन उसे उतना ही साफ़-सुथरा दूसरों या फिर स्वयं के लिए नहीं छोड़ते जब वो दोबारा यहां पर आएंगे.

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इस टीम ने टप्पलवाड़ी, जुम्मापट्टी, खोपोली, पांडवकड़ा, चिंचोटी, आनंदवाड़ी, कोंडेश्वर, भिवपुरी, पलसदारी, अम्बेवाडी, खारघर, प्रबलमाची और वाडप में मौजूद झरनों को साफ़ किया है.

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अगर आप भी कहीं घूमने जाएं तो वहां की स्वच्छता का ध्यान रखें. क्योंकि जब कोई जगह स्वच्छ होगी, तो वहां जाने का आनंद ही अलहदा होगा.