घर से निकलते वक़्त जब भी किसी स्कूल बस या वैन पर नज़र पड़ती है, स्कूल की पुरानी यादें ताज़ा जाती हैं. बच्चों के खिलखिलाते चेहरे देख सोचने लगती हूं ये बच्चे कितने लकी हैं जो बिना किसी टेंशन के बस सिर्फ़ मस्ती ही मस्ती में लगे हुए हैं. काश! मुझे भी इनकी तरह मस्ती करने का मौका मिल पाता.

ख़ैर, मेरी स्कूल लाइफ़ भी बेहद यादगार रही है. मैंने भी स्कूल टाइम में ख़ूब मस्ती की है. स्कूल में पढ़ाकू होने के साथ-साथ मैं काफ़ी शरारती भी थी.

मैं स्कूल में हमेशा लंच ब्रेक होने से पहले अपने दोस्तों के टिफ़िन ख़त्म कर दिया करती थी. लेकिन उनको अपने टिफ़िन पर हाथ भी नहीं लगाने देती थी. कई बार तो क्लास के दौरान खाने पर मेरी शिकायत तक कर दी जाती थी. हालांकि, मैं ख़ुद से कभी भी नहीं पकड़ी गई.

lunch break

मैं जैसे-जैसे बड़ी होती जा रही थी क्लास बंक करने लगी. 11वीं क्लास की बात है मैं और मेरी सबसे अच्छी दोस्त केमिस्ट्री की क्लास बंक करके पूरे स्कूल में घूम रहे थे. तभी हमें पता चलता है कि हमारे सर हमे ढूंढ रहे हैं. ऐसे में डर के मारे हम दोनों गर्ल्स वॉशरूम में चले गए. हमने सोचा सर यहां ढूंढ नहीं पाएंगे और न ही अंदर आ पाएंगें. लेकिन वो एक टीचर को लेकर आए और हमें वॉशरूम से निकाला. फिर जो डांट पड़ी वो तो थी ही मगर घर पर भी फ़ोन लगा दिया गया था.

मैथ्स मुझे बचपन से ही पसंद नहीं थी. मैथ्स मतलब आफ़त थी मेरे लिए. मुझे कुछ नहीं समझ आता था. ऐसे में मैथ्स का होमवर्क में हमेशा दूसरों का कॉपी करती थी. गेम्स के दौरान सब ख़ेल रहे थे तो हैं मैं मैथ्स कर रही होती थी. फ्री पीरियड में सब मस्ती कर रहे हैं और मैं मैथ्स कॉपी. इस कॉपी करने के चक्कर में मुझे बहुत डांट भी पड़ा करती थी.

school

सबसे अच्छा दिन होता था जब मेरे दोस्तों के बर्थडे होते थे. ऐसे में हमे मैथ्स पीरियड और कई अन्य पीरियड बंक मारने का मौका मिलता था और पूरे स्कूल में भी. अच्छा, कितनी शान की बात होती थी न उस समय कि टॉफ़ी बांटने के लिए किसको चुना जाएगा.

हर एग्ज़ाम ख़त्म होने के बाद कहना कि 'अगली बार से पक्का पढूंगी'. मगर होता क्या था? आख़िर में एग्ज़ाम से एक दिन पहले ही पढ़ती थी. एक बार मैंने अपनी दोस्त को बायोलॉजी पढ़ाया था. उस पेपर में न तो वो पास हुई और न ही में, घर से डांट और ताने अलग मिले थे.

flames
Source: sundaresanthinks

नोटबुक के पीछे FLAMES खेलना, दोस्तों को उनके क्रश के नाम से चिढ़ाना. डस्टबिन के पास खड़े हो कर बात करना. और न जाने ऐसी कितने यादें और बातें हैं जो स्कूल लाइफ़ अपने अंदर समेटे हुई है. वाकई, स्कूल टाइम लाइफ़ का सबसे बेस्ट टाइम था.