बॉलीवुड फ़िल्मों से लेकर मुंबई की शान रही ‘पद्मिनी टैक्सी’ जून 2020 के बाद सड़कों पर दिखाई नहीं देगी. दरअसल, आइकॉनिक इंडो-इटालियन मॉडल की प्रीमियर ‘पद्मिनी टैक्सी’ का उत्पादन साल 2000 से बंद है. इसके चलते मुंबई में अब इस मॉडल की 50 से भी कम टैक्सी बची हैं. एक समय वो भी था जब मायानगरी मुंबई में ये टैक्सी पिज़्ज़ा से भी ज़्यादा मशहूर हुआ करती थी. 

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साल 1964 में फ़िएट 1100 के स्वदेशी वर्जन के तौर पर इस गाड़ी को बतौर ‘Fiat 1100 Delight’ बाज़ार में उतारा गया था. लॉन्च के एक साल बाद ही इसका नाम बदलकर ‘Premier President’ कर दिया गया. साल 1974 में एक बार फ़िर से इसका नाम रानी पद्मिनी के नाम पर ‘Premier Padmini’ रखा गया.   

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बस स्टेशन हो या फ़िर एयरपोर्ट, मुंबई आने वाले हर शख़्स का सामना सबसे पहले काले और पीले रंग की पद्मिनी से ही होता था. पद्मिनी इसलिए भी लोगों की पहली पसंद होती थी क्योंकि इसके अंदर बैठने के लिए काफ़ी जगह होने और छत पर सामान रखने के लिए कैरियर लगा होता था. 

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मुंबई के परेल निवासी किशोर राज याद करते हुए बताते हैं कि, चाहें निजी यात्रा हो या फिर किसी बिजनेस ट्रिप पर कहीं जाना हो. पद्मिनी ही उनकी पहली पसंद होती थी. उस वक़्त ड्राइवरों को गूगल मैप की ज़रूरत नहीं पड़ती थी. 

60 के दशक में दिल्ली और कोलकाता में एम्बेसडर कार का वर्चस्व था. लेकिन मुंबईवासियों ने ‘एम्बेसडर’ के बजाए ‘पद्मिनी टैक्सी’ को तरजीह दी थी. करीब चार दशकों तक इस पद्मिनी ने लोगों के दिलों राज किया. 90 के दशक में करीब 63,200 रिकॉर्ड टैक्सी ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में रजिस्टर हुई थीं.  

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साल 1911 में ‘पद्मिनी टैक्सी’ ने विक्टोरिया बग्घी को रिप्लेस कर कई दशकों तक अपना वर्चस्व कायम रखा. इस टैक्सी को आपने कई बॉलीवुड फ़िल्मों में भी देखा होगा. अब ये ऐतिहासिक टैक्सी अगले साल बंद होने जा रही है.   

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‘मुंबई टैक्सी यूनियन’ के नेता ए एल क्वाड्रोस का कहना है कि, इन टैक्सियों ने दशकों तक मुंबईकर के दिलों पर राज किया. हर दिन लाखों लोगों को उनकी मंज़िल तक पहुंचाया.