लोकनायक जयप्रकाश नारायण के बारे में हम शायद उतना नहीं जानते जितना आज़ादी के दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानते हैं. जेपी (जयप्रकाश नारायण) को भारत छोड़ो आंदोलन का हीरो कहा जाता है. हालांकि उनकी बड़ी पहचान 1974 के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से उभरती है.

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1974 का आंदोलन कई नामों से जाना गया. कभी छात्र आंदोलन तो कभी बिहार मूवमेंट और कभी संपूर्ण क्रांति. इस आंदोलन के बाद से भारत की राजनीति में बड़ा मोड़ आया जिसका असर आज भी देखा जा सकता है. इसी आंदोलन से ऐसे कई नेता निकले, जिन्हें बाद में सत्ता का शीर्ष नसीब हुआ. कुछ नेता वो थे जिन्होंने सीधे-सीधे जयप्रकाश नारायण के पीछे आंदोलन का झंडा उठाया, तो कुछ नाम ऐसे भी रहे जो आंदोलन के बाद लगे आपातकाल की वजह से सुर्खियों में आएं.

1. लालू यादव

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लालू यादव 1970 से छात्र राजनीति में सक्रिय थे, साल 1973 में वो पटना विश्वविद्याल के छात्र संघ के अध्यक्ष भी चुने गए थे. अगले साल उन्होंने जेपी के आंदोलन में हिस्सा लिया और जनता पार्टी से उनकी नज़दीकियां बढ़ गईं. साल 1977 में उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर छपरा से लोकसभा चुनाव लड़ा और राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते हुए बिहार के मुख्यमंत्री भी बने.

2. नीतीश कुमार

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पटना NIT से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले नीतीश कुमार ने राजनीति की बारीकियां जय प्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया से सीखीं. संपूर्ण क्रांति के दौरान नीतीश कुमार ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिस वजह से आपातकाल हटने के बाद 1977 में जनता पार्टी की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला.

3. सुशील कुमार मोदी

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जिस समय लालू प्रसाद यादव छात्र संघ के अध्यक्ष थे, सुशील कुमार मोदी उनके सचिव हुआ करते थे. बिहार छात्र संघर्ष समिति के साथ जुड़ कर उन्होंने जेपी के आंदोलन में हिस्सा लिया था. आंदोलन के दौरान सुशील कुमार मोदी को पांच बार गिरफ़्तार किया गया था. वर्तमान में सुशील कुमार मोदी बिहार के उप-मुख्यमंत्री हैं.

4. राम विलास पासवान

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राम विलास पासवान संपूर्ण क्रांति से पहले भी मुख्यधारा की राजनीति का हिस्सा था. वो साल 1969 से ही संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की ओर से विधायक चुने गए थे. आंदोलन में राम विलास पासवान ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था. आपातकाल के दौरान उनकी भी गिरफ़्तारी हुई थी. 1977 के चुनाव में राम विलास पासवान ने जनता पार्टी के टिकट पर हाज़ीपुर से चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीता.

5. रवि शंकर प्रसाद

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रवि शंकर प्रसाद छात्र राजनीति के समय के लालू प्रसाद यादव के समकालीन हैं. रविशंकर प्रसाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े हुए थे और छात्र आंदोलन के दौरान उन्होंने जेपी का साथ दिया था. इस आंदोलन की वजह से भी रवि शंकर प्रसाद का कद ABVP में बढ़ा और लंबे समय तक RSS से भी जुड़े रहे.

6. मुलायम सिंह यादव

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साल 1967 में ही मुलायम सिंह यादव पहली बार विधायक चुन लिए गए थे, राम मनोहर लोहिया से राजनीति का पहाड़ा सीखने वाले नेता जी इंदिरा गांधी के खिलाफ़ क्रांति में हिस्सा लिया था, आपातकाल के दौरान 19 महीने तक मुलायम सिंह हिरासत में रहें और जेल से निकलने के बाद 1977 में स्टेट मिनिस्टर बन गए.

7. अरुण जेटली

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70 के दशक में अरुण जेटली दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस में ABVP के नेता हुआ करते थे, अंदोलन में हिस्सा लेने से पहले 1974 में वो दिल्ली विश्विद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष बन चुके थे. आपातकाल के दौरान अरुण जेटली ने भी 19 महीने जेल में बिताए थे. वो आंदोलन के बड़े नेताओं में से एक थे, वो जयप्रकाश नारायण द्वारा बनाए गए National Committee For Students And Youth Organization के संयोजक थे.

8. विजय गोयल

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वर्तमान में विजय गोयल भाजपा के कद्दावर नेता हैं और राज्य सभा के सांसद हैं. आपातकाल के पहले विजय गोयल दिल्ली के छात्र राजनीति में मौजूद थे और RSS के सदस्य हुआ करते थे. आपातकाल के दौरान उनकी भी गिरफ़्तारी हुई थी, जेल से निकलने के बाद उन्होंने ABVP की ओर से छात्र संघ का चुनाव लड़ा और अध्यक्ष चुने गए.

9. सुष्मा स्वराज

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70 के दशक में ही सुष्मा स्वराज की राजनीतिक सफ़र ABVP के साथ शुरू हो चुकी थी. उनके पति स्वराज कौशल समाजवादी नेता जॉर्ज फ़र्नान्डिस के नज़दीकी हुआ करते थे. साल 1975 में सुष्म स्वराज जॉर्ज की लीगल डिफ़ेंस टीम का हिस्सा बन गई और उन्होंने भी जय प्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. आपातकाल के बाद सुष्मा स्वराज ने भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ गईं.