'14 फरवरी 2019'

ये तारीख़ अब शायद ही कोई हिंदुस्तानी भूल पाएगा. सीआरपीएफ़ के काफ़िले पर हुए आतंकी हमले ने न सिर्फ़ हमारे कई जवान छीन लिये, बल्कि कई घरों को भी तबाह कर दिया. शहीद जवानों में कई ऐसे जवान हैं, जिनके जाने से उनके बच्चे और मां-बाप अनाथ हो गये. घरवालों की नम आंखें और उनकी सिस्कियां सभी देशवासियों का मन विचलित कर रही हैं.

अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले के बारे में अब कई कहानियां भी सामने आ रही हैं, जिसमें चंद कहानियां इन शहीदों की भी हैं.

1. नाम- श्याम बाबू, उम्र- 32 वर्ष, कांस्टेबल, कानपुर देहात

बीते गुरुवार को लगभग करीब 10 बजे श्याम बाबू के पिता राम प्रसाद को पुलवामा हमले के बारे में सूचित किया गया. श्याम बाबू की अपने पीछे अपनी 29 वर्षीय पत्नी रूबी देवी, पांच साल बेटा आयुष और 6 महीने की बेटी आयुषी छोड़ गये हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 6 साल पहले ही श्याम बाबू की शादी हुई थी और 2005 में जब उनका घर बन रहा था, तब उन्हें पहली पोस्टिंग मिली.


पिछले दिसंबर वो 45 दिनों के छुट्टी पर आये थे, इसके बाद 29 जनवरी को वो वापस ड्यूटी पर चले गये. इसके बाद 1 फरवरी को वो फिर से छुट्टी पर घर आये, लेकिन इसके बाद जब वो 10 फरवरी को वापस ड्यूटी के लिये रवाना हुए, तो फिर बस उनके शहीद होने की ख़बर आई.

2. नाम- अजीत कुमार आज़ाद, उम्र- 32 वर्ष, कांस्टेबल, उन्नाव

देश के लिये जान कुर्बान करने वाले अजीत कुमार के पिता को अपने बेटे पर गर्व है. अजीत अपने पांच भईयों में सबसे बड़े थे, इसके साथ ही उनकी 9 और 7 वर्षीय दो बेटियां भी हैं. 2007 में अपनी पहली पोस्टिंग के बाद से ही वो घर पर अकसर कहते थे कि एक दिन आप लोगों को सुनने को मिलेगा कि मैंने देश के लिए अपनी जान दे दी. हांलाकि, घरवालों की तरफ़ से उन्हें हमेशा नौकरी छोड़ने के लिये कहा गया, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. वहीं 10 फरवरी को ड्यूटी पर वापस लौटते वक़्त, उन्होंने जून में घर वापस आने का वादा किया था.


अजीत की इस कुर्बानी के बाद उनकी दोनों बेटियां आर्मी स्कूल में भर्ती होने की तैयारी कर रही हैं.

3. नाम- अमित कुमार, उम्र- 22 वर्ष, कांस्टेबल, शामली

गुरुवार को अमित के बड़े भाई प्रमोद सिंह टीवी चैनल पर आंतकी हमले की ख़बर देख रहे थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनका छोटा भी इस हमले में मारा गया है. वहीं जब सुबह उन्हें अमित की मौत की ख़बर मिली, तो वो विश्वास नहीं कर पाये कि उनके भाई के साथ ऐसा हुआ है. शामली में रेलपार क्षेत्र निवासी अमित 2017 में सीआरपीएफ़ में शामिल हुआ था.


अपने घर में वो पहला और अकेला ऐसा व्यक्ति था, जो सुरक्षा बल में शामिल होने के लिए गया था. 15 दिन की छुट्टी के बाद वो 12 फरवरी को ड्यूटी जॉइन करने के लिये वापस लौटा था. हमले से एक दिन पहले उसने अपने भाई से बात कर घरवालों का हालचाल लिया था.

4. नाम- प्रदीप कुमार, उम्र- 38 वर्ष, कांस्टेबल, शामली

शामली के बनत निवासी प्रदीप कुमार के घर में उनकी पत्नी शर्मिष्ठा देवी और दो बेटे हैं. सिद्धार्थ इंटरमीडिएट का छात्र है, तो वहीं दूसरा बेटा विजय 9वीं क्लास में है. सिद्धार्थ ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि जब उसने टीवी पर हमले की ख़बर देखी, तो कई बार कॉल करके पता लगाने की कोशिश की, कहीं उस बस में उसके पिता भी तो नहीं थे, लेकिन उसे इस बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाई.


प्रदीप के बड़े भाई इस महीने सेना से सेवानिवृत्त हुए थे. 2003 में सीआरपीएफ़ में शामिल होमे वाले प्रदीप हर रोज़ अपने बेटों को सुरक्षा बलों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करते थे. 12 फरवरी को ड्यूटी पर वापस लौटने वाले प्रदीप के बच्चों को नहीं पता था कि ये उनकी उनके पिता से आख़िरी मुलाक़ात है.

5. नाम- प्रदीप सिंह, उम्र- 35 वर्ष, कांस्टेबल, कन्नौज

बुधवार को आख़िरी बार प्रदीप ने अपने परिवार से फ़ोन पर बात की थी, उस समय वो जम्मू से श्रीनगर के लिए रवाना होने वाले थे. प्रदीप के चचेरे भाई नीरज यादव का कहना है कि शाम में हमें उनकी मौत की ख़बर मिली. कन्नौज के अज़ान गांव के रहने वाले प्रदीप के घर में उनकी पत्नी नीरजा देवी, दो बेटियां सुप्रिया और सोना हैं, जिनकी उम्र क्रमश: 11 साल और 3 साल है.


प्रदीप एक महीने की छुट्टी के बाद 10 फरवरी को घर से ड्यूटी के लिये निकल गये थे.

6. नाम- विजय कुमार मौर्य, उम्र- 38 साल, कांस्टेबल, देवरिया

देवरिया के भटनी के रहने वाले विजय 2008 में सीआरपीएफ़ में शामिल हुए थे. वो अपने पीछे पत्नी विजय लक्ष्मी और दो साल की बेटी आराध्या छोड़ गये हैं. वहीं आतंकी हमले की ख़बर देखने के बाद विजय के परिवार ने उनके सीआरपीएफ़ वाले दोस्तों उनके बारे में जानने के लिये फ़ोन किया, लेकिन कहीं से कुछ पता नहीं चला.


वहीं शाम को जम्मू-कश्मीर में तैनात एक सीआरपीएफ़ अधिकारी का विजय के परिवार को फ़ोन करके उनके शहीद होने की पुष्टि की. 10 दिन की छुट्टी पर घर आये विजय, 9 फरवरी को घर से ड्यूटी के लिये लौट गये थे.

7. नाम- पकंज कुमार त्रिपाठी, उम्र- 26 साल, कांस्टेबल, महाराजगंज

पुलवामा हमले में शहीद होने वाले पकंज के पिता पेशे से किसान हैं. हमले की सुबह ही उन्होंने अपनी पत्नी रोहिणी से बातचीत की. बस इसके कुछ घंटे बाद ही परिवार ने टीवी पर हमले की ख़बर देखी, जिसके बाद उनके चचेरे भी ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारी को फ़ोन लगाया, पर कुछ पता नहीं चल पाया. वहीं बाद रोहिणी के पास पकंज के शहीद होने की ख़बर आई. पकंज आखिरी बार नवंबर में छुट्टी पर घर आये थे, अपने पीछे वो प्रतीक नामक एक बेटा छोड़ गये.

8. नाम- रमेश यादव, उम्र- 26 वर्ष, कांस्टेबल, वाराणसी

रमेश यादव एक हफ़्ते के लिये छुट्टी पर घर आये थे और मंगलवार को जम्मू-कश्मीर लौट गये. रमेश के बाद अब उनके घर में कमाने वाले सदस्य सिर्फ़ उनके भाई कन्हैया बचे हैं, जो कि एक प्राइवेट फ़र्म में काम करते हैं. इसके अलावा घर में उनकी पत्नी रेणु और 2 साल का बेटा आयुष भी है. वहीं गुरुवार रात 9 बजे कैन्हया को आतंकी हमले में रमेश के शहीद होने की ख़बर मिली.

9. नाम- महेश कुमार, उम्र- 26 वर्ष, कांस्टेबल, प्रयागराज

महेश और उनकी पत्नी संजू देवी ने 2011 में शादी कर नई ज़िंदगी की शुरुआत की थी, जिससे उनके दो बेटे समर(6) और समीर (5) भी हैं. एक हफ़्ते की छुट्टी के बाद ही वो सोमवार को जम्मू के लिए रवाना हुए. महेश के पिता मुंबई में ऑटो रिक्शा चलाते हैं, इसके अलावा उनका छोटा भाई और बहन स्कूल में हैं. कुछ दिन पहले ही आख़िरी बार फ़ोन पर उनकी घरवालों से बात हुई थी.

10. नाम- अवधेश कुमार यादव, उम्र- 30 वर्ष, हेड कांस्टेबल, चंदौली

छुट्टी पर घर आये अवधेश 11 फरवरी को ड्यूटी के लिये निकल गये थे. गुरुवार सुबह उन्होंने अपनी पत्नी शिल्पा को फ़ोन कर कहा था कि अभी वो बस में हैं और बाद में फ़ोन में करेंगे, लेकिन इसके बाद सिर्फ़ उनके मौत की ख़बर आई, उनकी कॉल नहीं. अवधेश का एक 2 साल का बेटा भी है.

11. नाम- राम वकील, उम्र- 37 साल, हेड कांस्टेबल, मैनपुरी

राम वकील 10 फरवरी को घर से ड्यूटी के लिये निकले थे और कुछ दिन पहले ही उन्होने घरवालों से फ़ोन पर बात की थी. वकील के घर में पत्नी गीता देवी (35) और तीन बच्चों - राहुल (10), अर्पित (8) और अंश (2) हैं. तीनों इटावा में केंद्रीय विद्यालय में पढ़ते हैं.


वकील के चचेरे भाई अगारा में पुलिस निरीक्षक हैं और पांच साल पहले राम के पिता की मुत्यु हो चुकी है.

12. नाम- कौशल कुमार रावत, उम्र- 47 साल, कांस्टेबल, आगरा

रावत के भाई ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि बुधवार को उन्होंने अपने ट्रांसफ़र की बात बताई थी, इससे पहले वो सिलीगुड़ी में पोस्टेड थे. आख़िरी बार वो अक्टूबर में छुट्टियों पर घर 10 दिन के लिये घर आये थे. घर में उनकी पत्नी ममता रावत (47) और तीन बच्चे अपूर्व (18), अभिनव (21) और विकास (20) हैं.

13. नाम- वी वी वसंत कुमार, उम्र-42, कांस्टेबल, वायनाड

गुरुवार तड़के जम्मू से श्रीनगर जाने वाली बस में सवार होने से पहले वसंता कुमार ने अपनी मां को फ़ोन किया और उन्हें बताया कि वह श्रीनगर में एक नई बटालियन में शामिल होने जा रहे हैं. इसके साथ उन्होंने श्रीनगर पहुंचने पर उसे फिर से फ़ोन करने का वादा किया. वहीं हमले के बाद उनकी पत्नी शीना ने कई बार फ़ोन कर उनकी ख़ैरियत जानने की कोशिश की, लेकिन बाद अगली सुबह उनके पास वसंत कुमार के शहीद होने की ख़बर आई. महीने की शुरुआत में वो पांच दिनों के लिये छुट्टी पर आये, जिसके बाद 8 तारीख़ को वापस लौट गये.


2001 में CRPF जॉइन करने वाले वसंत दो साल बाद रिटायरमेंट लेने वाले थे. शहीद जवान के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं, जो कि स्कूल में पढ़ते हैं.

14. नाम- रोहिताश लांबा, उम्र-28, कांस्टेबल, जयपुर

रोहिताश 10 दिसंबर को पिता बने, लेकिन तब उन्हें छुट्टी नहीं मिल पाई जिस वजह से 16 जनवरी को घर आए और 31 जनवरी को चले गए. दो महीने का बच्चा अभी दुनिया देख भी नहीं पाया था कि सिर से पिता का साया उठ गया. टीवी चैनल्स के माध्यम से परिवारों को हमले के बारे में पता चला और शाम को रोहिताश के शहीद होने की ख़बर आ गई.

15. नाम- नारायण लाल गुर्जर, उम्र-40, हेड कांस्टेबल, राजसमंद

राजसमंद ज़िले के बिनोल गांव के रहने वाले नारायण लाल गुर्जर लगभग 1 महीने के लिये छुट्टी पर आये थे और महीने की शुरुआत में वापस लौट गये. शहीद के घरवालों को उनकी शहादत पर गर्व है. नारायण के घर में उनकी पत्नी मोहनी, बेटी हेमलता और 12 वर्षीय पुत्र मुकेश है.

16. नाम- हेमराज मीणा, उम्र-44, हेड कांस्टेबल, कोटा

हेमराज की पत्नी मधु, दो बेटे और दो बेटियां हैं. हेमराज के बड़े भाई का कहना है कि गुरुवार शाम हेमराज की बेटी रीना को अधिकारी ने फ़ोन पर उसके पिता की मृत्यु की सूचना दी, लेकिन हम सबसे उससे कहा कि ये सच नहीं है. पर सुबह राजनेताओं और मीडिया के ज़रिये सभी को पता कि गया कि अब वो इस दुनिया में नहीं है.

17. नाम- जीत राम, उम्र-30, कांस्टेबल, भरतपुर

कांस्टेबल जीत राम के छोटे भाई विक्रम राम का कहना है कि उन्होंने भाई की ख़बर के बारे में अपने माता-पिता को कुछ नहीं बताया है. जीत राम के दो बच्चे हैं.

18. नाम- भागीरथ सिंह, उम्र-26, कांस्टेबल, धौलपुर

भागीरक्ष के पिता किसान हैं और वो 6 साल पहले ही सीआरपीएफ़ में शामिल हुआ था. भागीरथ अपने पीछे एक तीन साल का बेटा और एक साल की बेटी छोड़ गये हैं. गांववालों का कहना है कि वो पिछले हफ़्ते ही घर से ड्यूटी के लिये निकले थे.

19. नाम- कुलविंदर सिंह, उम्र-26, कांस्टेबल, आनंदपुर साहिब

कुलविंदर सिंह के पिता दर्शन सिंह ट्रक ड्राइवर और मां अमरजीत एक गृहणी हैं. वो अपने कज़न की शादी में शामिल होने 10 दिन के लिये घर पर आये थे. इस साल नवंबर में उनकी भी शादी होनी थी. कुलविंदर के कज़न ने बताया कि गुरुवार सुबह मेरी उससे फ़ोन पर बात हुई, लेकिन जब मैंने शाम को 4 बजे करीब फ़ोन किया, तो उसका फ़ोन ऑफ़ था.

20. नाम- जयमल सिंह, उम्र-44, हेड कांस्टेबल, मोगा

हेड कांस्टेबल जयमल सिंह ने गुरुवार सुबह करीब 8 बजे पत्नी सुखजीत से फ़ोन पर बात की थी. सुखजीत ने बताया कि वो फ़ोन पर बता रहे थे कि जब तक दूसरा ड्राइवर छुट्टी पर है, तब तक उसकी जगह वो काम करेंगे. वहीं जैसे ही उन्होंने श्रीनगर जाने की बात कही वो परेशान हो गई और इसके बाद उनका दोबारा फ़ोन नहीं आया.

21. नाम- सुखजिंदर सिंह, उम्र-32, कांस्टेबल, तरनतारन

सुखजिंदर सिंह हाल ही में अपने पहले बच्चे के जन्म के बाद लोहड़ी मना कर ड्यूटी पर लौटे थे. शहीद के बड़े भाई का कहना है कि उनकी शादी के 8 साल बाद बच्चा हुआ था, जिससे वो काफ़ी ख़ुश था और भविष्य की योजना बना रहा था. वहीं सुखजिंदर सिंह के पिता का कहना है कि बेटे की मौत के बाद उन्होंने सब खो दिया.

22. नाम- मोहन लाल, सहायक उप निरीक्षक, उत्तरकाशी

मोहन लाल कुछ वर्ष पहले ही परिवार के साथ देहरादून शिफ़्ट हुए थे, ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके. वहीं उनके दामाद सर्वेश कुमार का कहना है कि वो आख़िरी बार दिसबंर में घर आये थे. मोहनलाल के घर में पत्नी सहित तीन बेटियां और दो बेटे हैं.

23. नाम- वीरेंद्र सिंह, कांस्टेबल, उधम सिंह नगर

20 दिन की छुट्टी के बाद वीरेंद्र सिंह ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी जॉइन की थी. वो थारू जनजाति का था और तीन भाइयों में सबसे छोटा था. वीरेंद्र के भाई को उसकी शहादत पर गर्व है, तो वहीं उनकी पत्नी, बेटी और बेटे का रो-रो कर बुरा हाल है.

24. नाम- संजय राजपूत, उम्र-45, हेड कांस्टेबल, बुलढाणा

संजय राजपूत 1996 में सीआरपीएफ़ में शामिल हुए थे. गुरुवार दोपहर करीब 1.30 बजे उन्होंने अपने भतीजे पीयूष बैस से बात की. ये आख़िरी बार था, जब उन्होंने अपने परिवार के साथ बात की थी. संजय के परिवार में पत्नी सुषमा (38) और बेटा जय (13) और शुभम (11) है.

25. नाम- नितिन शिवाजी राठौड़, उम्र-37, कांस्टेबल, बुलढाणा

हमले से कुछ घंटे पहले गुरुवार की सुबह नितिन शिवाजी राठौड़ ने अपनी पत्नी वंदना से बात की. दंपति के दो बच्चे हैं, जीवन (10) और जीविशा (5) हैं. वहीं नितिन के भाई का कहना है कि हम चाहते हैं कि सरकार दुश्मनों से बदला लेकर शहीद जवानों का बदला ले.

26. नाम- सुब्रमण्यन जी, उम्र-28, कांस्टेबल, तूतीकोरिन

सुब्रमण्यन महीनेभर की छुट्टी के बाद रविवार को घर वापस निकल गये. वो पिता के उपचार के लिये घर आये थे. वहीं हमले से एक घंटे पहले उन्होंने पत्नी को फ़ोन कर पिता की देखभाल करने के लिये कहा.

27. नाम- सी शिवचंद्रन, उम्र-32, कांस्टेबल, अरियालुर

हमले से लगभग 2 घंटे पहले उन्होंने अपनी गर्भवती पत्नी को फ़ोन किया था. शिवचंद्रन की पत्नी गृहणी है और उनके माता-पिता दोनों खेती करते हैं, उनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है. घर पर एक महीने रहने के बाद वो ड्यूटी पर वापस लौटे थे.

28. नाम- सुदीप विश्वास, उम्र-27, कांस्टेबल, नादिया

सुदीप विश्वास उनके परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था, उनके पिता संन्यासी विश्वास खेती करते हैं. 2014 में सुदीप के सीआरपीएफ़ में शामिल होने के साथ ही परिवार धीरे-धीरे ग़रीबी से बाहर आ रहा था और इस साल के अंत में उसकी शादी करने की योजना बनाई थी.


सुदीप के पिता जी ने बताया कि उसने गुरुवार सुबह 10 बजे फ़ोन किया था, इसके बाद 3.10 पर बात हुई और शुक्रवार सुबह उसकी मौत की ख़बर आ गई.

29. नाम- रतन कुमार ठाकुर, उम्र-30, कांस्टेबल, भागलपुर

गुरुवार दोपहर करीब 1.30 बजे रतन ने अपनी पत्नी को फ़ोन किया और कहा कि वो बस में है और शाम तक श्रीनगर पहुंच जायेगा. इसके बाद सीआरपीएफ़ की तरफ़ से उसके शहीद होने की ख़बर आई. रतन के पिता का कहना कि मेरा एक बेटा था, लेकिन मुझे गर्व है कि वो देश के लिये कुछ करक गया.

30. नाम-मनोज कुमार बेहरा, उम्र-33, कांस्टेबल, कटक

दिसंबर में मनोज वार्षिक छुट्टी पर आये थे और उन्होंने अपनी बेटी का जन्मदिन मनाया और 6 फरवरी को वापस लौट गये. मनोज के चचेरे भाई का कहना है कि ये जम्मू-कश्मीर में उनकी दूसरी पोस्टिंग थी. पिता जितेंद्र बेहरा ने कहा कि मनोज ने हमले से कुछ घंटे पहले अपनी पत्नी और मां को फ़ोन किया था. हमले के बारे में सुनने के बाद, हमने उसे फ़ोन करने की कोशिश की, लेकिन उसका फ़ोन बंद था.

देश के सभी शहीद जवान और उनके परिवार वालों की हिम्मत को सलाम और देश का हर नागरिक आपका कर्ज़दार रहेगा.