एकमात्र भारतीय जिसने अंतरिक्ष की सैर की है, वो हैं राकेश शर्मा. अब आप कहेंगे कि कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स भी तो अंतरिक्ष की यात्रा कर चुकी हैं. हां, वो भी अंतरिक्ष की यात्रा कर चुकी हैं, पर वो भारतीय मूल की अमेरिकन एस्ट्रोनॉट्स थीं. राकेश शर्मा ही एक मात्र भारतीय हैं, जिन्होंने ये कामयाबी हासिल की है. आज जानते हैं कि कैसी थी राकेश शर्मा की पहली अंतरिक्ष यात्रा.

3 अप्रैल 1984 को अंतरिक्ष में जाकर इंडिया का नाम रौशन करने वाले राकेश शर्मा एक एयरफ़ोर्स पायलट थे. हिंदुस्तान और रूस की दोस्ती को नए अगले पायदान पर ले जाने के लिए सोवियत संघ की स्पेस एजेंसी Soviet Interkosmos ने 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने एक प्रस्ताव रखा.

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वो भारतीय वायुसेना और Soviet Interkosmos के साथ एक अंतरिक्ष यात्रा का प्रस्ताव लेकर आए थे. इसके तहत उन्होंने दो भारतीयों को अपने आगामी स्पेस मिशन में शामिल होने का ऑफ़र दिया था. इंडिया इस सुनहरे अवसर को गंवाना नहीं चाहता था. इसलिए खोज होने लगी ऐसे लोगों की जो अंतरिक्ष यात्रा के लिए फ़िट हों. सितंबर 1982 में भारतीय वायुसेना के दो पायलट राकेश शर्मा और रवीश मल्होत्रा को सेलेक्ट कर लिया गया.

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सेलेक्शन तो इस मिशन का एक पहला कदम था, असली परीक्षा तो अभी बाकी थी. दोनों भारतीय पायलट्स को 18 महीने की ट्रेनिंग के लिए रूस के स्टार सिटी अंतरिक्ष यात्री परीक्षण केंद्र भेजा गया. यहां दोनों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा. एक तो ये स्पेस स्टेशन मास्को से 70 किलोमीटर दूर एक बर्फ़ीले इलाके में था.

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राकेश और रवीश दोनों को बर्फ़ीले मौसम में ट्रेनिंग के लिए एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग में जाना पड़ता था. वहीं दूसरी तरफ उनके ऊपर रूसी भाषा सीखने की तलवार लटक रही थी. क्योंकि सारी ट्रेनिंग रूसी भाषा में ही होने वाली थी. जैसा कि सभी जानते हैं, हम इंडियन्स कभी हार नहीं मानते, ऐसा ही जज़्बा इन दोनों भी दिखाया. दोनों ने रोज़ाना 7 घंटे की रूसी भाषा की क्लास लेकर तीन महीने में रूसी भाषा सीख ली.

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इसके बाद उन्होंने अपनी ट्रेनिंग भी पूरी कर ली. ट्रेनिंग दोनों की हुई थी, लेकिन अंतरिक्ष में जाने का मौक़ा केवल राकेश शर्मा को ही मिला. 2 अप्रैल 1984 में उन्हें दो अन्य रूसी अंतरिक्ष यात्रियों( Malyshev और Strekalov) के साथ Soyuz T-11 रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा गया था. इस टीम ने Salyut 7 अंतरिक्ष केंद्र में पहुंच कर 43 Scientific और Technical एक्स्पेरिमेंट किए थे.

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राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट गुज़ारे थे. उन्होंने अंतरिक्ष से उत्तर भारत की तस्वीरें भी खींची थीं. उनकी टीम ने अंतरिक्ष से रूस और इंडिया की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ बात भी की थी. इसका सीधा प्रसारण नेशनल टेलीविज़न पर किया गया था.

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जब भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा था कि अंतरिक्ष से हमारा देश कैसा दिखाई देता है, तब राकेश शर्मा ने कहा था-'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा.' ये वो पल था जब करोड़ों भारतीयों का सीना फख्र से चौड़ा हो गया था. 1984 में राकेश शर्मा को अंतरिक्ष की यात्रा पर भेजने वाला भारत 14वां देश बन गया था.

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अंतरिक्ष से वापस लौटने के बाद सोवियत सरकार ने राकेश शर्मा को ‘हीरो ऑफ़ सोवियत यूनियन’ के अवॉर्ड से सम्मानित किया था. वहीं भारत सरकार ने राकेश शर्मा, Malyshev और Strekalov को शांति-काल के सबसे बड़े बहादुरी पुरस्कार ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया था. इस मिशन के साथ ही 'हिंदी-रूसी भाई-भाई' का नारा एक बार फिर से अंतर्राष्ट्रीय अख़बारों की सुर्खियों में छा गया था.

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