सांई बाबा के दर्शन करने के लिए हर साल लाखों लोग शिरडी की यात्रा करते हैं. ऐसी मान्यता है कि यहां पर समाधी में विलीन हो जाने के बाद आज वो यहां विराजमान हैं. इतने सारे श्रद्धालुओं के लिए यहां पर भोजन की व्यवस्था भी की जाती है. यहां की रसोई का नाम है ‘साईं प्रसादालय’, जो दुनिया की सबसे बड़े किचन में शुमार हैं. चलिए जानते हैं इस रसोई की ख़ासियत के बारे में. 

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साईं ट्रस्ट के मुताबिक, इस रसोईं की शुरुआत सांई बाबा ने 19वीं सदी में की थी. कहते हैं कि वो स्वयं अपने हाथों से आटा पीस कर भक्तों के लिए रोटियां बनाते थे. तभी से ही ये किचन चलता आ रहा है. आज यहां पर रोज़ाना आने वाले 60-80 हज़ार श्रद्धालूओं के लिए ब्रेकफ़ास्ट से लेकर लंच और डिनर तक तैयार किया जाता है. 

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एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस मेगा किचन में रोज़ाना 5-6 हज़ार किलो आटा गूंदा जाता है. इनसे 3 घंटे में तकरीबन 30 हज़ार रोटियां मशीनों की मदद से तैयार की जाती हैं. ये किचन 12 हज़ार स्क्वायर फ़ीट के एरिया में फैला हुआ है. इसमें एक साथ 3500 लोगों के बैठकर खाने की व्यवस्था की गई है. ग़रीब लोगों के लिए भोजन मुफ़्त है, जबकि सक्षम और वीआईपी लोगों से मामूली शुल्क लिया जाता है.

आम लोगों के लिए 10 रुपये प्रति थाली और वीवीआईपी लोगों के लिए 40 रुपये प्रति थाली वसूले जाते हैं. ये किचन सुबह 7 बजे शुरू होता है और रात को 9 बजे बंद. यहां लगभग 120 लोग काम करते हैं. इसमें खाना बनाने के सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है. रसोई की छत पर एक सोलर सिस्टम बनाया गया है. इससे मिलने वाली ऊर्जा से ही खाना तैयार किया जाता है.

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इस किचन में सब्ज़ी काटने, आंटा गूंदने और रोटियां बनाने का काम मशीनों द्वारा ही किया जाता है. साई प्रसादालय को एशिया के सबसे बड़े सोलर किचन का ख़िताब हासिल है. अगली बार आप शिरडी के साईंबाबा के दर्शन करने जाना तो यहां के भोजन का लुत्फ़ उठाना न भूलना.

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