भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने एक बार कहा था कि 'अगर आपको ग़रीबी से ऊपर उठना है तो शिक्षा ही एकमात्र ज़रिया है'. कलाम साहब ने ठीक ही कहा था क्योंकि शिक्षा ही हमें ग़रीबी से मुक्ति दिला सकती है.

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आज महान साइंटिस्ट कलाम के उन्हीं शब्दों से प्रेरणा लेते हुए चंडीगढ़ के संदीप कुमार ने भी देश में शिक्षा की क्रांति फ़ैलाने के लिए कमर कस ली है. संदीप 'Open Eye Foundation' के ज़रिये ऐसे ज़रूरतमंदों के सपनों को परवान चढ़ाने का कार्य कर रहे हैं जो शिक्षा से वंचित रह गए हैं.

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संदीप शहर भर के तमाम सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और उन तमाम जगहों पर घूम-घूमकर ऐसे बच्चों की तलाश करते हैं जो पढ़ना तो चाहते हैं लेकिन उनके पास महंगी किताबें ख़रीदने के लिए पैसे नहीं हैं. संदीप ऐसे बच्चों को फ़्री में किताबें बांटते हैं ताकि वो अपने सपनों को साकार कर सकें.

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इस नेक काम के लिए संदीप घर-घर जाकर किताबें कलेक्ट करते हैं. पिछले 2 साल में वो करीब 10 हज़ार से ज़्यादा किताबें कलेक्ट कर चुके हैं.

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संदीप का एनजीओ जल्द ही 200 Underprivileged बच्चों को गोद लेने जा रहा है. वो चाहते हैं कि अन्य लोग भी इस नेक काम के लिए आगे आयें ताकि उनकी एक छोटी सी कोशिश से किसी ज़रूरतमंद का भविष्य उज्ज्वल हो सके.

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ANI से बातचीत में संदीप ने कहा कि, जब वो शिक्षक बनने के लिए जेबीटी (जूनियर बेसिक ट्रेनिंग) कर रहे थे उस दौरान उन्होंने देखा कि कैसे कुछ छात्र पढ़ने के साधन न होने के बावजूद अपने सपने को साकार करने में लगे हुए हैं.

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जब मैं ट्रेनिंग से वापस लौटा तो मेरी नज़र घर में पड़ी मेरी ढेर सारी पुरानी किताबों पर पड़ी. फिर अहसास हुआ कि क्यों न इन्हें किसी ज़रूरतमंद को दे दें. ताकि वो अपने सपनों की उड़ान भर सके. बस वो दिन था और आज का दिन है किताबें दान करने का ये सिलसिला जारी है.

आज हमारे पास करीब 200 बच्चे हैं जिन्हें हम फ़्री में किताबें दे रहे हैं. जबकि शहर में कई ऐसी संस्थाएं भी हैं जो इन ज़रूरतमंदों को फ़्री ट्यूशन देने का नेक कार्य कर रही हैं.

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संदीप कुमार की इस नेक कोशिश को हमारा सलाम. उम्मीद करते हैं कि वो 200 नहीं बल्कि इस देश के हर ज़रूरतमंद बच्चे के हाथ में किताब देने का काम करें.