धरती पर मौजूद प्रजातियों में से 99 प्रतिशत प्रजातियां अब नहीं हैं. मानव के धरती पर आने से पहले Background Extinction के पीरियड में अधिकांश प्रजातियां गायब हो गईं थीं. कुछ प्रजातियां हर 1,00,000 वर्षों  में विलुप्त हो जाती हैं. धरती से प्रजातियों का लुप्त होना कई बार कम अंतराल पर भी होता है.

हज़ारों साल पहले होने वाला विलोपन, ज्वालामुखियों से निकलते बड़ी मात्र में कार्बन डाई ऑक्साइड की वजह से होता था. वायुमंडल का तापमान इतना अधिक था, जिसे धरती पर उपस्थित जीव जंतु और वनस्पतियां सह नहीं पायीं. अब वायुमंडल प्रदूषण, कार्बन डाई ऑक्साइड के बढ़ते स्तर और ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से एक बार फिर जीवों के विलुप्त होने का संकट बढ़ता नज़र आ रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है धरती पर कुछ जीवों के विलुप्त होने की संभावनाएं बढ़ रही हैं.

अगर वैज्ञानिकों का मानना सही है, तो हज़ारों साल पहले की उन परिस्थियों को जानते हैं जिनकी वजह से धरती से जीवों का विनाश हुआ था. वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक केवल पांच बड़ी तबाही हुई हैं, जब धरती से बड़े स्तर पर जीव गायब हुए हैं. इन सबमें ज़्यादा प्रसिद्ध डायनासोर का धरती से मिट जाना है.

इन घटनाओं को समझने के लिए हमें सबसे पहले समझना होगा कि हज़ारों साल पहले ऐसा क्या हुआ था, जो धरती से इतने बड़े स्तर पर जीव विलुप्त हो गए.

1. The Late Ordovician

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445 मिलियन वर्ष पहले धरती पर आये विनाशकारी परिवर्तन के पीछे, South Pole या  ‘दक्षिणी ध्रुव’ में  बर्फ़ का जमना था. यह पहली घटना थी जब धरती बर्फ़ की चपेट में आई थी.

2. The Late Devonian

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380 मिलियन वर्ष पहले धरती के Viluy Traps इलाक़े में ज्वालामुखी विस्फोट हुआ, जिसके कारण धरती से बड़े स्तर पर जीव विलुप्त हो गए. इस विस्फोट से समुद्र तल में ऑक्सीजन की कमी हुई होगी जिसकी वजह से समुद्र तटीय जीवों का विनाश हुआ होगा. Viluy Traps अब आधुनिक साइबेरिया में है.

3. The Middle Permian

वैज्ञानिकों ने अभी हाल में ही एक और घटना चक्र का पता लगाया है, जब धरती पर एक विनाशकारी परिवर्तन हुआ था. क़रीब 262 मिलियन वर्ष पहले धरती पर तीसरी बार विस्फोट हुआ था. यहां भी बर्फ़ का जमना एक प्रमुख कारण रहा है.

उस समय धरती पर रहने वाले लगभग अस्सी प्रतिशत जीवों का विनाश हो गया था. वैज्ञानिकों के अनुसार अब ये जगह चीन में पड़ती है.

4. The Late Permian

धरती पर चौथा बड़ा विस्फोट 252 मीलियन वर्ष पहले हुआ था. इसका परिणाम यह हुआ कि धरती से 96 प्रतिशत जीव विलुप्त हो गए. इस विस्फोट का कारण था Siberian Traps का ज्वालामुखी विस्फोट. ये विस्फोट साइबेरिया में हुआ था. उस वक़्त की सबसे तपती ज़मीन आज इतनी ठंडी है कि उधर से भारत की ओर आने वाली हवाओं को रोकने के लिए हिमालय पर्वत की ऊंचाई भी कम पड़ती है.

5. The Late Triassic

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यह Triassic Event 201 मिलियन वर्ष पहले हुआ था. इस विस्फोट की चपेट में पूरी धरती आई थी. जहां-जहां ज्वालामुखी का लावा फ़ैला वहां- वहां जीवों का अस्तित्त्व नहीं रहा. हालांकि इस बार केवल धरती से 47 प्रतिशत जीव कम हुए थे. विलुप्त होने वाले जीवों में रेंगने वाले जीव, जलीय, थलीय और हवा में उड़ने वाले जीव भी शामिल थे. डायनासोर के विनाश का जुरासिक पीरियड भी इसी बीच शुरू हुआ था.

इन विस्फोटों के कारण धरती का तापमान बढ़ने लगा और ध्रुवों से बर्फ़ पिघलने लगी. धरती के अंदर का जलीय भाग और विस्फोटों के बाद बनी गहरी खाई ने Atlantic Ocean को जन्म दिया.

क्या हम भी विनाश की ओर बढ़ रहे हैं?

हां! परिस्थितियां कुछ ऐसी ही बन रही हैं. पर्यावरण का बढ़ता तापमान, ग्लोबल वॉर्मिंग, ध्रुवों से बढ़ती संख्या में ग्लेशियरों का पिघलना और बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण इस बात के संकेत दे रहे हैं. उस वक़्त धरती की तबाही के लिए प्रकृति ज़िम्मेदार थी, लेकिन अब आने वाले कुछ सौ सालों में धरती की तबाही के लिए इंसान ज़िम्मेदार होगा.

विनाशकारी परिवर्तन हुए लगभग 66 मिलियन वर्ष हो गए हैं, लेकिन अब भविष्य में विनाश की संभावनाएं बढ़ रही हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में होने वाली तबाही पिछली तबाही से लगभग 50 प्रतिशत ज़्यादा ख़तरनाक होगी. जिस तरह से इंसान जैव विविधता के लिए ख़तरा बन रहा है, उसके मद्देनज़र यह कहना ग़लत नहीं होगा कि आने वाले दिनों में जैव विविधता के ख़त्म होने का ख़तरा और बढ़ जाएगा. आने वाले 100 या 1000 सालों में हो सकता है धरती पर कोई ऐसा विस्फोट हो, जिसके कारण धरती का ‘Eco System’ तबाही की ओर बढ़ जाए.

भविष्य को देखकर अगर आधुनिक मानव पर्यावरण के प्रति सचेत नहीं रहा, तो आने वाली पीढियां धरती को अपने सामने तबाह होते देखेंगी.

Article Source : Dailymail