केरल अपनी ख़ूबसूरती के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है और एर्नाकुलम केरल के सबसे समृद्ध जिलों में से एक है. इन दिनों इस जिले का Muppathadam गांव सुर्ख़ियों में हैं. सुर्ख़ियों में इसलिए क्योंकि इस गांव के 70 वर्षीय श्रीमन नारायणन वो काम कर रहे हैं, जो शायद ही कोई करता होगा.

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दरअसल, अवॉर्ड विनिंग राइटर और लॉटरी डीलर नारायणन प्रकृति की रक्षा के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही वो लोगों के बीच मुफ़्त में मिट्टी के बर्तन बांटना शुरू कर देते हैं, ताकि चिलचिलाती धूप में पक्षी पानी पी सकें.

श्रीमन नारायणन इस नेक काम के लिए अब तक कुल 6 लाख रुपये की कीमत के 10 हज़ार मिट्टी के बर्तन बांट चुके हैं.

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नारायणन ने पिछले साल एर्नाकुलम जिले में करीब 15 लाख रुपये की कीमत के 50 हज़ार पौधे मुफ़्त में बांटे थे. इससे पहले नारायणन अपने गांव Muppathadam में लगभग 10,000 पेड़ भी लगा चुके हैं. इस दौरान उन्होंने गांववालों से कहा था कि हर शख़्स अपने घर के आगे एक फ़लदार पेड़ ज़रूर लगाए, ताकि पक्षी फल खा सकें.

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नारायणन का कहना है कि 'गर्मियों में पक्षियों के पानी पीने का एकमात्र ज़रिया हम इंसान ही होते हैं. वो बेज़ुबां जानवर हमसे मांगकर तो पानी पी नहीं सकते, इसलिए हमें ख़ुद ही ये पहल शुरू करनी होगी. अगर हम एक बर्तन में पानी डालकर रख दें, तो उससे 100 से अधिक पक्षियों की प्यास बुझ सकती है'.

प्रसिद्ध लेखक और होलसेल लॉटरी डीलर होने के बावजूद श्रीमन साधरण जीवन जीना पसंद करते हैं और लोगों को भी गांधीवादी तरीके से जीने की सीख देते हैं.

नारायणन 'An Earthen Pot For Life Saving Water’ प्रोजेक्ट के तहत करीब 9,000 मिट्टी के बर्तन सोसाइटी, क्लब और शैक्षणिक संस्थानों को वितरित कर चुके हैं. इस प्रोजेक्ट को उन्होंने साल 2018 में शुरू किया था.

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नारायणन का कहना है कि 'वर्तमान में जिस तरह से लोग धरती के विनाश की रूप-रेखा तय करने में लगे हुए हैं, मैं नहीं चाहता कि आने वाले बच्चों का भविष्य भयानक हो. लॉटरी व्यवसाय और गांव के छोटे से रेस्तरां से मिलने वाली आय से जितना भी मुझसे हो सकता है, वो करने की कोशिश कर रहा हूं'.

नारायणन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों को बेहद मानते हैं, इसीलिए वो पिछले 6 सालों से सभी सामाजिक कार्य, 'My Village Through The Ways Of Gandhiji' के तहत करते आ रहे हैं. उन्होंने अपने इस अभियान की शुरुआत गांधी जी की ऑटोबायोग्राफ़ी 'The Story of My Experiments with Truth' की 5 हज़ार प्रतियां लोगों के बीच बांटकर की थी.

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मलयालम और अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर, नारायणन को साल 2016 में अपनी कविता 'कुट्टीकालुडे गुरुदेव' के लिए राज्य सरकार पुरस्कृत कर चुकी है. केरल की 'पेरियार नदी' में फैले प्रदूषण को लेकर भी वो कई किताबें लिख चुके हैं. पर्यावरण की रक्षा के प्रयासों के लिए हाल ही में उन्हें 'SK Pottekkatt' पुरस्कार मिल चुका है.